नई दिल्ली: सर्दियों के आते ही कार मालिकों के सामने एक ऐसी समस्या उभरकर आती है, जिसके बारे में आमतौर पर कम लोग ध्यान देते हैं-टायर प्रेशर में कमी. जैसे ही तापमान गिरता है, हवा सिकुड़ने लगती है और इसका सीधा असर टायरों पर दिखाई देता है. यही वजह है कि ठंड के मौसम में टायरों का दबाव सामान्य दिनों की तुलना में कम हो जाता है. इस मामूली बदलाव से आपकी कार के माइलेज, नियंत्रण और टायर की उम्र पर बड़ा प्रभाव पड़ता है.
कम प्रेशर पर चलने से न केवल इंजन पर अतिरिक्त भार पड़ता है, बल्कि सड़क पर पकड़ भी कम हो जाती है. इसलिए सर्दियों में टायर प्रेशर को नियमित रूप से चेक करना और उचित स्तर पर बनाए रखना आपकी सुरक्षा, खर्च और ड्राइविंग अनुभव-तीनों के लिए जरूरी है.
कम तापमान में हवा सिकुड़ जाती है, जिससे टायर के अंदर का प्रेशर अपने-आप कम हो जाता है. ठंड के दिनों में 1–2 PSI की कमी सामान्य है. यह कमी छोटी दिखती जरूर है, लेकिन इससे रोलिंग रेसिस्टेंस बढ़ जाता है और इंजन को वाहन चलाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है.
कम प्रेशर होने पर टायर सड़क से ज्यादा रगड़ खाते हैं, जिससे फ्यूल की खपत बढ़ जाती है. सही PSI बनाए रखने पर माइलेज 5% से 15% तक बेहतर हो सकता है. यानी केवल सही हवा भरवाकर आप ईंधन की बचत कर सकते हैं.
कम हवा वाले टायर किनारों से ज्यादा घिसते हैं. इससे टायर जल्दी खराब होते हैं और खर्च बढ़ जाता है. संतुलित प्रेशर टायर को समान रूप से घिसने देता है, जिससे उनकी उम्र ज्यादा होती है और बदलवाने का खर्च कम हो जाता है.
हर कार कंपनी अपने वाहन के लिए मानक PSI बताती है. यह जानकारी कार के दरवाजे, फ्यूल कैप या यूजर मैन्युअल में लिखी मिल जाती है. सामान्यत: आगे 36 PSI और पीछे 32 PSI की सलाह दी जाती है, लेकिन अलग-अलग कारों के मानक अलग हो सकते हैं. हमेशा कंपनी द्वारा बताए गए PSI को ही फॉलो करें.
बेहतर होगा कि कार में एक छोटा पोर्टेबल एयर पंप हमेशा मौजूद रहे. इससे घर या बीच रास्ते में भी हवा भरी जा सकती है. इसे कार के 12V सॉकेट या USB पोर्ट से चलाया जा सकता है, इसलिए बिजली की अलग जरूरत नहीं पड़ती. ध्यान रखें-गर्म टायर में हवा न भरें, टायर को ठंडा होने दें और फिर प्रेशर सेट करें.