नई दिल्ली: भारत में अब कार खरीदते समय लोग सिर्फ माइलेज या डिजाइन नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन पर भी खास ध्यान दे रहे हैं. ट्रैफिक में क्लच दबाने की परेशानी से बचने के लिए ऑटोमैटिक गाड़ियों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. यही वजह है कि कंपनियां अलग-अलग तकनीक वाले गियरबॉक्स पेश कर रही हैं. बाजार में AMT, CVT, DCT, iMT और टॉर्क कन्वर्टर AT जैसे विकल्प उपलब्ध हैं. दिखने में ये सभी ऑटोमैटिक लगते हैं, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली, कीमत और ड्राइविंग अनुभव अलग-अलग है. इसलिए खरीदने से पहले इनके अंतर को समझना जरूरी है.
AMT यानी ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन असल में मैनुअल गियरबॉक्स का ऑटोमैटिक रूप है. इसमें क्लच पेडल नहीं होता, बल्कि सेंसर और एक्चुएटर गियर बदलते हैं. यह कम लागत में ऑटोमैटिक सुविधा देता है. Maruti Suzuki की WagonR और Alto K10 में AMT विकल्प मिलता है. इसकी कीमत मैनुअल वेरिएंट से लगभग 50,000 से 70,000 रुपये अधिक होती है.
CVT में पारंपरिक गियर नहीं होते, बल्कि बेल्ट और पुली सिस्टम काम करता है. यह जरूरत के अनुसार गियर रेशियो बदलता रहता है, जिससे ड्राइविंग काफी स्मूद रहती है. हालांकि तेज एक्सीलरेशन पर रबर बैंड जैसा अहसास हो सकता है. Honda City और Kia Seltos के कुछ वेरिएंट्स में CVT उपलब्ध है. यह AMT से लगभग 50,000 से 1 लाख रुपये महंगा हो सकता है.
DCT यानी डुअल क्लच ट्रांसमिशन में दो क्लच होते हैं, जो गियर बदलने की प्रक्रिया को तेज और स्मूद बनाते हैं. यह तकनीक उन लोगों के लिए बेहतर है जिन्हें तेज रफ्तार और स्पोर्टी ड्राइविंग पसंद है. Hyundai Creta और Kia Seltos में DCT विकल्प मिलता है. इसकी कीमत मैनुअल से करीब 1.5 से 2 लाख रुपये ज्यादा हो सकती है.
iMT में गियर आपको बदलना होता है, लेकिन क्लच पेडल नहीं दिया जाता. यह मैनुअल से थोड़ा महंगा और DCT से सस्ता विकल्प है. Kia Sonet और Hyundai Venue में यह मिलता है. वहीं टॉर्क कन्वर्टर AT पूरी तरह ऑटोमैटिक सिस्टम है, जो हाइड्रोलिक तकनीक पर काम करता है. Toyota Fortuner जैसी SUVs में यह दिया जाता है. इसकी कीमत मैनुअल से लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये ज्यादा हो सकती है.