आपके शरीर में कहां विराजते हैं गणपति बप्पा? जानें मूलाधार चक्र का रहस्य

आध्यात्मिक और योग परंपरा के अनुसार भगवान गणेश का संबंध मानव शरीर के मूलाधार चक्र से माना जाता है. मूलाधार को रीढ़ के निचले हिस्से के आसपास स्थित पहला चक्र बताया जाता है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व 14 सितंबर से शुरू होने जा रहा है. इस दौरान भक्त घरों और पूजा पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना कर उनकी पूजा करते हैं. भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ शुरुआत का देवता माना जाता है. आध्यात्मिक परंपराओं में उनका संबंध मानव शरीर के मूलाधार चक्र से भी बताया गया है.

योग और आध्यात्मिक परंपरा में मानव शरीर में सात प्रमुख चक्र माने जाते हैं. इन्हें मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार कहा जाता है. इन चक्रों को आध्यात्मिक रूप से शरीर, मन और चेतना के अलग-अलग स्तरों से जोड़कर देखा जाता है. इनमें मूलाधार चक्र सबसे पहला माना जाता है.

कहां-कहां होते हैं स्थित?

मूलाधार चक्र रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से के आसपास स्थित माना जाता है. मूलाधार का अर्थ जीवन का मूल आधार होता है. आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार यह चक्र स्थिरता, सुरक्षा, आधार और जीवन शक्ति से जुड़ा है. इसी कारण भगवान गणेश को मूलाधार चक्र का अधिष्ठाता देवता माना जाता है.


शरीर और चेतना का आधार

भगवान गणेश और मूलाधार चक्र के बीच संबंध को प्रतीकात्मक रूप से भी समझा जाता है. गणेश जी को विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाला देवता माना जाता है. वहीं मूलाधार को शरीर और चेतना का आधार माना गया है. इसलिए किसी भी नई शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा को मूलाधार की स्थिरता से जोड़ा जाता है.

योग परंपरा में क्या है मान्यता?

योग परंपरा में कुंडलिनी शक्ति के जागरण की यात्रा भी मूलाधार से शुरू होने की मान्यता है. आध्यात्मिक साधना में ध्यान और योग के जरिए चेतना को ऊपर के चक्रों की ओर ले जाने की बात कही जाती है. इस दृष्टि से गणेश आराधना को साधक के भीतर स्थिरता, सुरक्षा और मानसिक संतुलन स्थापित करने वाली साधना के रूप में देखा जाता है.

गणपति अथर्वशीर्ष में भी भगवान गणेश को मूलाधार से जोड़ने वाला उल्लेख मिलता है. इसमें कहा गया है, "त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्". इसका भावार्थ है कि भगवान गणेश नित्य मूलाधार में स्थित हैं. इसी कारण आध्यात्मिक परंपरा में गणेश जी को मूलाधार चक्र का प्रमुख देवता माना जाता है.

आध्यात्मिक परंपराओं की मान्यता

यह ध्यान रखना जरूरी है कि चक्रों और उनके देवताओं से जुड़ी बातें योग और आध्यात्मिक परंपराओं की मान्यताओं का हिस्सा हैं. आधुनिक विज्ञान इन्हें शरीर के प्रमाणित शारीरिक अंग या ऊर्जा केंद्र के रूप में स्वीकार नहीं करता. इसलिए इसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझना उचित है.

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा का संदेश केवल बाहरी पूजा तक सीमित नहीं माना जाता. आध्यात्मिक दृष्टि से यह अपने भीतर स्थिरता, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का भी प्रतीक है. यही वजह है कि गणेश जी को शुभ शुरुआत और बाधाओं को दूर करने वाला देवता मानकर सबसे पहले उनकी आराधना की जाती है.