नई दिल्ली: रक्षाबंधन का त्योहार इस बार 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा. भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक यह पर्व इस वर्ष खास शुभ योगों के कारण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन पर रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग का त्रिवेणी संगम बन रहा है. इन योगों को शुभ और मंगलकारी माना जाता है.
मान्यता है कि शुभ योगों में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है. ऐसे में बहन द्वारा भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधना केवल परंपरा नहीं बल्कि भाई की सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना का प्रतीक माना जाता है. वहीं भाई भी बहन की सुरक्षा और सम्मान का संकल्प लेता है.
ज्योतिष में रवि योग को बेहद शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग में किए गए शुभ कार्यों से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होने की कामना की जाती है. रक्षाबंधन पर इस योग का होना भाई-बहन के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है. श्रद्धा और विश्वास के साथ इस समय रक्षासूत्र बांधने से भाई के जीवन में सुख और शांति आने की मान्यता है.
सर्वार्थ सिद्धि योग को सभी कार्यों की सफलता से जुड़ा शुभ योग माना जाता है. मान्यता है कि इस योग में किए गए धार्मिक और शुभ कार्यों से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं. रक्षाबंधन पर इस योग के दौरान भाई को राखी बांधने से उसके जीवन में तरक्की और सफलता की कामना की जाती है. नौकरी, कारोबार और अन्य कार्यों में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की भी धार्मिक मान्यता है.
शोभन योग को प्रेम, सौहार्द और मधुर संबंधों से जोड़कर देखा जाता है. रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के प्रेम के पर्व पर इसका होना रिश्तों के लिए शुभ माना जा रहा है. इस योग में रक्षासूत्र बांधने से भाई-बहन के बीच प्रेम और विश्वास मजबूत होने की मान्यता है. परिवार में सुख और शांति के लिए भी यह संयोग खास माना जा रहा है.
इस तरह रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग का एक साथ बनना रक्षाबंधन को धार्मिक दृष्टि से खास बना रहा है. हालांकि शुभ योगों के प्रभाव से जुड़ी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं.