नई दिल्ली: जन्माष्टमी 2026 का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा. त्योहार को लेकर घरों में लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. मंदिर की सफाई और सजावट भी जन्माष्टमी की तैयारियों का अहम हिस्सा है.
पूजा में इस्तेमाल होने वाली पीतल, तांबे और कांसे की थाली, लोटा, घंटी और दूसरे बर्तन समय के साथ काले पड जाते हैं और उनकी चमक फीकी हो जाती है. ऐसे में कुछ घरेलू तरीकों से इन्हें दोबारा चमकाया जा सकता है.
पीतल और तांबे के बर्तनों की सफाई के लिए नमक और नींबू का इस्तेमाल किया जा सकता है. बर्तन पर थोड़ा नमक छिडकें और आधे नींबू से इसे धीरे-धीरे रगडें. इसके बाद बर्तन को साफ पानी से धोकर सूती कपडे से अच्छी तरह पोंछ दें. इससे बर्तन की सतह पर जमा गंदगी और कालापन कम करने में मदद मिल सकती है.
तांबे और पीतल के पुराने तथा काले पडे बर्तनों को साफ करने के लिए इमली का इस्तेमाल भी किया जाता है. इमली का गूदा निकालकर उसमें थोडा पानी मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को बर्तन पर लगाकर करीब 10 मिनट के लिए छोड दें. इसके बाद बर्तन को हल्के हाथ से साफ करें और पानी से धोकर सूखे कपडे से पोंछ दें.
विनेगर और लिक्विड साबुन की मदद से भी पूजा के बर्तनों की सफाई की जा सकती है. एक बाउल में थोडा लिक्विड साबुन और विनेगर मिलाएं. बर्तन पर मिश्रण लगाकर कुछ देर के लिए छोड दें. इसके बाद नरम हाथों से बर्तन साफ करें और पानी से अच्छी तरह धो लें. यह तरीका पीतल, तांबे और कांसे के बर्तनों पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
बेकिंग सोडा भी धातु के बर्तनों की सफाई में काम आ सकता है. इसके लिए बेकिंग सोडा में थोडा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं. इसे बर्तन पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड दें. इसके बाद मुलायम कपडे या नरम स्पंज से धीरे-धीरे साफ करें और पानी से धो लें.
बर्तनों को साफ करने के बाद उन्हें गीला न छोडें. साफ और मुलायम सूती कपडे से अच्छी तरह सुखाएं. नमी लंबे समय तक रहने से धातु की सतह पर दोबारा दाग या कालापन आ सकता है. जन्माष्टमी से कुछ दिन पहले मंदिर और पूजा के बर्तनों की सफाई कर लेने से त्योहार वाले दिन पूजा और सजावट की तैयारियों के लिए ज्यादा समय मिल सकता है.