नई दिल्ली: जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भक्त लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जन्माष्टमी की पूजा में कुछ विशेष सामग्री शामिल करने से पूजा का महत्व बढ़ जाता है और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है.
जन्माष्टमी की पूजा थाली में सबसे पहले पीला चंदन, रोली और गंगाजल रखना चाहिए. गंगाजल का इस्तेमाल भगवान के आचमन और स्नान के लिए किया जाता है. पूजा में लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाना विशेष माना जाता है. इसके अलावा धनिये की पंजीरी, पंचामृत या चरणामृत, फल और मिठाई भी भोग में शामिल की जा सकती है.
श्रीकृष्ण को तुलसी बेहद प्रिय मानी जाती है. इसलिए भोग की थाली में तुलसी के पत्ते जरूर रखें. धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान कृष्ण को लगाया गया भोग अधूरा माना जाता है. पूजा के दौरान घी का दीपक, धूपबत्ती, कपूर और रुई की बाती भी रखना चाहिए.
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में बांसुरी और मोर पंख का भी विशेष महत्व माना जाता है. इसके साथ पीले फूलों से लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जा सकता है. पीला रंग भगवान कृष्ण से जुड़ा माना जाता है, इसलिए पूजा और सजावट में पीले फूल, वस्त्र और अन्य सामग्री का इस्तेमाल शुभ माना जाता है.
जन्माष्टमी 2026 में 04 सितंबर को मनाई जाएगी. दिए गए पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 04 सितंबर को रात 02 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत रात 12 बजकर 29 मिनट पर होगी और इसका समापन रात 11 बजकर 04 मिनट पर होगा. चंद्रोदय रात 11 बजकर 29 मिनट पर बताया गया है.
जन्माष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद घर और पूजा स्थल की सफाई करके लड्डू गोपाल की पूजा करें. रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा और आरती करने के बाद उन्हें माखन-मिश्री और अन्य भोग अर्पित करें.
इस दिन कृष्ण चालीसा और श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. व्रत रखने वाले लोगों को लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन से बचना चाहिए. धार्मिक परंपराओं में इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करने और अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, धन या जरूरत की वस्तुओं का दान करने का भी महत्व बताया गया है.