नई दिल्ली: चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली हनुमान जयंती भक्तों के लिए बेहद खास होती है. इस बार 2026 में हनुमान जयंती श्री राम की जयंती के कुछ दिन बाद आएगी. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हनुमान कलियुग में भक्तों के कष्ट हरने वाले जागृत देवता माने जाते हैं. उनकी जन्म कथा बेहद रोचक और दिव्य है, जो उनके बल और भक्ति दोनों को दर्शाती है.हनुमान जी को मारुति और पवनपुत्र भी कहा जाता है. उनके जन्म से जुड़ी कथाएं आज भी भक्तों को प्रेरणा देती हैं.
हनुमान जी का जन्म माता अंजना और वानर राज केसरी के घर हुआ. ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण उन्हें वानर योनि में जन्म लेना पड़ा. केसरी और अंजना संतान सुख से वंचित थे. उन्होंने मतंग ऋषि की सलाह पर अंजना को नारायण पर्वत पर बारह वर्ष तक तपस्या करने की सलाह दी. तपस्या के दौरान वायुदेव ने अंजना के कान से प्रवेश कर उन्हें महाबली पुत्र का वरदान दिया. इसी कारण हनुमान जी को पवनपुत्र या मारुति कहा जाता है.
एक अन्य कथा के अनुसार, अंजना ने दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या की. प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया कि वह उनकी कोख से जन्म लेंगे. उसी समय अयोध्या में राजा दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ कर रहे थे. अग्निदेव द्वारा दी गई खीर का थोड़ा भाग एक पक्षी के पंजों में फंसकर अंजना के हाथ में गिर गया. उन्होंने उसे शिव प्रसाद मानकर ग्रहण कर लिया, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ.
हनुमान जी जन्म से ही अत्यंत बलशाली थे. एक दिन भूख लगने पर उन्होंने उदय होते सूर्य को लाल फल समझ लिया और उसे निगलने के लिए आकाश में उड़ गए. इस देख इंद्र देव क्रोधित हो गए और उन्होंने वज्र से प्रहार कर दिया. प्रहार से उनकी ठुड्डी टूट गई. इसी घटना के कारण उनका नाम हनुमान पड़ा, जिसका अर्थ है 'टूटी ठुड्डी वाला'.
इस घटना के बाद देवताओं ने हनुमान जी को अमरता और अनेक दिव्य शक्तियां प्रदान कीं. उन्होंने उन्हें वरदान दिया कि कोई भी अस्त्र उन्हें घायल नहीं कर सकेगा. बचपन से ही वे बुद्धिमान, तेजस्वी और राम भक्ति से परिपूर्ण थे. आज भी हनुमान जी के भक्त उन्हें संकटमोचन के रूप में पूजते हैं और मानते हैं कि उनकी कृपा से सभी कठिनाइयां दूर हो जाती हैं.
हनुमान जयंती के दिन भक्त विशेष पूजा, व्रत और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं. उनकी कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और निष्ठा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं. 2026 की हनुमान जयंती पर लाखों भक्त मंदिरों में उमड़ेंगे और पवनपुत्र से शक्ति एवं साहस की कामना करेंगे.
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