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Bhai Dooj 2025: आज है भाई दूज, खास दिन पर जानें क्या करें और क्या नहीं, विशेष नियमों का करें पालन

Bhai Dooj 2025: भाई दूज 2025 पर बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी. भाई अपनी बहनों को उपहार देंगे. इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना गया है, जैसे झूठ न बोलना, तामसिक चीजें न खाना और आपसी प्रेम बनाए रखना.

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Edited By: Reepu Kumari
Bhai Dooj 2025: आज है भाई दूज, खास दिन पर जानें क्या करें और क्या नहीं, विशेष नियमों का करें पालन
Courtesy: Pinterest

Bhai Dooj 2025: दिवाली के उत्सव के पांच दिवसीय श्रृंखला का अंतिम दिन भाई दूज मनाया जाता है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है. इसे भाऊ बीज, भैया दूज, भात्र द्वितीया, भाई द्वितीया और भतरु द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देकर प्रेम और स्नेह व्यक्त करता है.

भाई दूज पर बहनें सुबह उठकर स्नान करती हैं, व्रत रखती हैं और भाई को न्योता भेजती हैं. भाई के आगमन पर पूजा की थाली सजाई जाती है, तिलक और कलावा बांधा जाता है, आरती उतारी जाती है और मिठाई खिलाई जाती है. इसके बाद भाई अपनी बहनों को गिफ्ट देते हैं. साथ ही, इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी शुभ माना गया है, जो धर्मशास्त्रों में वर्णित हैं.

भाई दूज शुभ मुहूर्त 2025

भाई दूज 2025 22 अक्टूबर की रात 08:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगी. तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:13 बजे से 03:28 बजे तक रहेगा. इस समय में पूजा और तिलक करने से भाई-बहन के संबंध मजबूत और मंगलमय माने जाते हैं.

भाई दूज पर क्या करें

  • भाई को घर बुलाएं और स्वागत करें.
  • पूजा की थाली सजाकर भाई को तिलक करें और आरती उतारें.
  • भाई को पान और मिठाई खिलाएं.
  • यमराज और यमुना की पूजा करें और उनकी कथा सुनें.
  • चित्र गुप्त, लेखनी और दवात की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है.
  • दीपदान और भोजन का आयोजन करें.

भाई दूज पर क्या न करें

  • इस दिन भाई अपनी बहनों से झूठ न बोले.
  • मांस, मदिरा और तामसिक चीजें न खाएं.
  • तिलक करने से पहले बहनें भोजन न करें.
  • भाई-बहन भूलकर भी एक-दूसरे से न लड़ें.

भाई दूज का महत्व और संदेश

भाई दूज केवल भाई-बहन के प्रेम का त्योहार नहीं है, बल्कि यह धर्म, संस्कार और परंपरा का प्रतीक भी है. इस दिन भाई की लंबी उम्र और बहन की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. नियमों और शुभ मुहूर्त का पालन करने से यह पर्व और भी पवित्र और मंगलमय बन जाता है.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.