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बंगाल में टाईटन्स की लड़ाई: शुभेंदु अधिकारी या ममता बनर्जी, अधीर रंजन की अग्निपरीक्षा; 7 हॉट सीटों पर नजर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आज 4 मई को घोषित होंगे, जिन पर पूरे देश की नजर टिकी है. 294 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ और 77 केंद्रों पर मतगणना जारी है.

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Edited By: Reepu Kumari
बंगाल में टाईटन्स की लड़ाई: शुभेंदु अधिकारी या ममता बनर्जी, अधीर रंजन की अग्निपरीक्षा; 7 हॉट सीटों पर नजर
Courtesy: Pinterest

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आज घोषित हो रहे हैं और इसके साथ ही कई बड़े नेताओं की किस्मत का फैसला भी हो जाएगा. पूरे राज्य में मतगणना के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. निर्वाचन आयोग ने 77 मतगणना केंद्रों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 432 पर्यवेक्षक तैनात किए हैं. चुनाव दो चरणों में संपन्न हुआ था और अब सभी की निगाहें उन सीटों पर टिकी हैं, जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प और निर्णायक माना जा रहा है.

भवानीपुर: ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा दांव पर

दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर सीट लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यहां से अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखती आई हैं. हालांकि इस बार मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा. शुभेंदु अधिकारी उनके सामने चुनौती बनकर खड़े हैं. मतदाता सूची में बदलाव और बड़ी संख्या में नाम हटने से यहां चुनावी समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं, जिससे यह सीट और भी ज्यादा चर्चा में आ गई है.

नंदीग्राम: पुरानी लड़ाई का नया अध्याय

नंदीग्राम वही जगह है, जहां से ममता बनर्जी के राजनीतिक उभार की शुरुआत हुई थी. 2007 के आंदोलन ने राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी थी. अब यही सीट एक बार फिर सुर्खियों में है. यहां शुभेंदु अधिकारी और टीएमसी के पवित्र कर के बीच मुकाबला हो रहा है. यह सीट तटीय बंगाल में बीजेपी और टीएमसी की ताकत का सीधा पैमाना मानी जा रही है.

डायमंड हार्बर: संगठन की असली परीक्षा

डायमंड हार्बर सीट पर इस बार पुनर्मतदान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया. विपक्ष ने ईवीएम को लेकर शिकायतें की थीं, जिसके बाद चार बूथों पर फिर से वोटिंग कराई गई. यह सीट दक्षिण बंगाल में टीएमसी की जमीनी ताकत को दर्शाती है. यहां का प्रदर्शन यह तय करेगा कि पार्टी का संगठन कितना मजबूत है और वह मतदाताओं के बीच कितना प्रभाव बनाए रखने में सफल रही है.

खड़गपुर सदर: दिग्गजों की सीधी टक्कर

खड़गपुर सदर सीट इस चुनाव की सबसे हाई-प्रोफाइल लड़ाइयों में से एक बन गई है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष यहां से मैदान में हैं. उनके सामने टीएमसी के प्रदीप सरकार और सीपीआई(एम) के मधुसूदन राय हैं. तीन प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर ने इस सीट को बेहद रोमांचक बना दिया है, जहां हर वोट का महत्व बढ़ गया है.

BJP को मिलेगा मौका या ममता लगाएंगी चौका यहां देखिए एनालिसिस स्टोरी.....

 

पानीहाटी: महिला सुरक्षा का मुद्दा केंद्र में

पानीहाटी सीट पर इस बार चुनावी चर्चा का केंद्र महिला सुरक्षा और न्याय का मुद्दा बन गया है. बीजेपी ने रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाया है, जिनकी पहचान एक संवेदनशील मामले से जुड़ी है. उनके सामने टीएमसी के तीर्थंकर घोष और सीपीआई(एम) के कलातन दासगुप्ता हैं. इस सीट पर भावनात्मक और सामाजिक मुद्दों का असर साफ देखा जा सकता है.

हिंगलगंज: आंदोलन से चुनावी मैदान तक

हिंगलगंज सीट पर संदेशखाली आंदोलन से उभरी रेखा पात्रा बीजेपी की उम्मीदवार हैं. उन्होंने हाल के चुनावों में अपनी पहचान बनाई है और क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत मानी जा रही है. पिछली हार के बावजूद उन्हें इस क्षेत्र में बढ़त मिली थी, जो उनके पक्ष में माहौल का संकेत देती है. इस बार उनका प्रदर्शन खास नजरों में रहेगा.

बहारामपुर: अधीर रंजन की अग्निपरीक्षा

बहारामपुर सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी की प्रतिष्ठा दांव पर है. पांच बार सांसद रह चुके चौधरी 2024 की हार के बाद अब विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं. उनके सामने बीजेपी के सुभ्रत मैत्रा हैं. यह मुकाबला न केवल स्थानीय बल्कि राज्य की राजनीति में कांग्रेस की स्थिति तय करने वाला भी माना जा रहा है.