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इसलिए भी खास हैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, हकीकत जानकर चौंक जाएंगे आप

डेढ़ दशक से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज ममता ‌बनर्जी बिना किसी तामझाम के रहती हैं। बंगला और कार तो छोड़िए उनके पास कुल 15 लाख की संपत्ति है। वह बहुत ही लो प्रोफाइल रहना पसंद करती हैं, कोई फिजूलखर्ची नहीं, सिर्फ जरूरी खर्च कर वह अपने आप में खास हो जाती हैं।

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
इसलिए भी खास हैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, हकीकत जानकर चौंक जाएंगे आप
Courtesy: Google

पश्चिम बंगाल की जनता के दिलों पर यूं ही राज नहीं करतीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. वह आम बनकर खास बनी हुई हैं. दरअसल हमेशा सफेद साड़ी और हवाई चप्पलों में दिखने वाली ममता दीदी देश के उन चंद नेताओं में शामिल हैं जो एकदम लो प्रोफाइल बने रहकर अपना काम करती हैं. ममता बनर्जी ने अपने हलफनामे में जो जानकारी दी है, उसके चलते वह आजकल चर्चा में हैं. आप भी जानिए, ममता बनर्जी ने अपने हलफनामें में ऐसी कौन सी चौंकाने वाली जानकारी दी है.

ममता बनर्जी के पास 15.4 लाख की संपत्ति

ममता बनर्जी ने अपने हलफनामें में बताया है कि उनके पास मात्र 15.4 लाख रुपये की संपत्ति है. डेढ़ दशक से लगातार बंगाल की मुख्यमंत्री और उससे पहले केंद्र सरकार में विभिन्न भूमिकाओं का निर्वहन करने के बाद भी उनके पास न तो अपना मकान है, न जमीन का टुकड़ा और न ही कार। इतनी कम संपत्ति ही ममता बनर्जी को खास लोगों से भी खास बना देने वाली है. 

सोना एक तौले से भी कम

महिलाओं को आभूषण और गहनों का शौक होता है लेकिन ममता बनर्जी के ऊपर यह शौक भी कोई असर नहीं दिखा पाया. आपको शायद यकीन करने में मु‌श्किल हो, लेकिन यही सच्चाई है कि ममता बनर्जी के पास एक तौले से भी कम सोना है, मात्र 9 ग्राम, 750 मिग्रा के सोने के गहने हैं उनके पास. हलफनामे के मुताबिक बंगाल की मुख्यमंत्री के पास मात्र 75 हजार, 700 रुपये की नकदी है, जबकि बैंक में कुल 12लाख, 76 हजार, 209 रुपये जमा बताए गए हैं.

अधिकारिक भूमिका ही आय का श्रोत

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री उन बिरले नेताओं में शुमार हैं जिनकी आय केवल उनकी अधिकारिक भूमिका ही है. उनकी गिनती देश के गरीब मुख्यमंत्रियों में होती है. एडीआर की ओर से 2021 में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक उस समय के 31 मुख्यमंत्रियों में ममता बनर्जी सबसे गरीब मुख्यमंत्री थीं. 

1970 में शुरू किया था सियासी सफर

ममता बनर्जी ने 1970 में अपना सियासी सफर शुरू किया था. करीब तीन दशक तक कांग्रेस में रहने वाली ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया और फिर 2011 में पश्विम बंगाल में अजेय माने जाने वाले वाम मोर्चे के किले को ढहा दिया. तब से ममता बनर्जी लगातार बंगाल की सत्ता पर काबिज हैं. कल होने वाली मतगणना के बाद एक बार फिर ममता बनर्जी के पॉलिटिकल फ्यूचर पर बड़ा फैसला सामने आने वाला है.