ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से टकराव बना हुआ है. हालांकि फिलहाल जंग रुकी हुई है, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण हैं. इसी बीच ईरान ने एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें कहा गया है कि वह होर्मुज का रास्ता खोल सकता है. यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है. लेकिन इसके बदले ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगी आर्थिक पाबंदियां हटाए और क्षेत्र में चल रही जंग को खत्म करे.
ईरान ने इस प्रस्ताव में साफ कहा है कि अगर अमेरिका नाकेबंदी हटाता है और युद्ध समाप्त करता है, तभी वह होर्मुज खोलने को तैयार होगा. इसके अलावा ईरान ने एक और अहम शर्त रखी है कि फिलहाल परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को टाल दिया जाए और उसे बाद में उठाया जाए. यह शर्त अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन के लिए परमाणु मुद्दा ही सबसे अहम रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को “बेहतर” तो बताया है, लेकिन इसे स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहे. उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों. ऐसे में जब तक यह मुद्दा हल नहीं होता, तब तक समझौता मुश्किल नजर आ रहा है. यही कारण है कि दोनों देशों के बीच बातचीत फिलहाल अटकी हुई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है. जंग शुरू होने से पहले जहां तेल की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 108 डॉलर तक पहुंच गई है. यानी करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी. इसका असर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. महंगाई बढ़ रही है और आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ता जा रहा है.
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. ईरान का प्रस्ताव भी पाकिस्तान के जरिए ही अमेरिका तक पहुंचाया गया है. इस्लामाबाद में बातचीत की उम्मीद थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने अपने प्रतिनिधियों की यात्रा रद्द कर दी. अब संकेत मिल रहे हैं कि बातचीत फोन पर हो सकती है. इससे साफ है कि कूटनीति जारी है, लेकिन रास्ता अभी भी कठिन है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में रूस पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. पुतिन ने ईरान का समर्थन करते हुए कहा कि रूस क्षेत्र में शांति लाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा. रूस की यह भूमिका इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि वह ईरान का पुराना सहयोगी है और दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं. मौजूदा हालात में यह साफ है कि मामला काफी जटिल हो चुका है.
एक तरफ ईरान समझौते के लिए तैयार दिख रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है. ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या दोनों देश किसी बीच के रास्ते पर सहमत होते हैं या तनाव और बढ़ता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस कूटनीतिक खेल पर टिकी हैं.