TVK के इस उम्मीदवार ने केवल 1 वोट से DMK को दी पटखनी, 5 राज्यों में सबसे ज्यादा दिलचस्प रहा इस सीट पर मुकाबला
तमिलनाडु में चुनाव कई मायनों में दिलचस्प रहा. इन वजहों में एक वजह यह भी है कि TVK को एक सीट पर महज एक वोट से जीत मिली. तो चलिए विस्तार से जानते हैं इस सीट और उस पर खड़े उम्मीदवार के बारे में.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में काफी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला. राज्य में TVK को सबसे अधिक वोट मिले, जो खुद में एक बेहद खास रिकॉर्ड है. क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ जब डीएमके और एआईएडीएमके जैसी राज्य की दोनों बड़ी पार्टियों को राज्य में आई नई पार्टी से हार का सामना करना पड़ा. हालांकि इन सब के बीच एक और विषय चर्चे में है.
DMK की ओर से चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार को एकल एक वोट से हार मिली है. जानकारी के मुताबिक डीएमके मंत्री की ओर से चुनाव लड़ रहे राज्य के सहकारिता मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन को तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट पर केवल एक वोट से हार का सामना करना पड़ा. जिससे यह साफ हो गयाकि एक-एक सीटों का खास महत्व है.
तमिलनाडु में इस सीट पर केवल 1 वोट से हार-जीत
के.आर. पेरियाकरुप्पन को टीवीके के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर ने महज एक वोट से चुनाव हरा दिया. जानकारी के मुताबिक पेरियाकरुप्पन 83,374 वोट मिलें, वहीं एक वोट ज्यादा पाकर सेतुपति विजय बने. यह अंतर दर्शाता है कि एक-एक वोटों की कितनी ज्यादा कीमत है. बता दें कि राज्य में कुल 234 सीटें है. जिनमें से टीवीके को सबसे ज्यााद 108 सीटें मिली है. वहीं राज्य की सबसे पुरानी पार्टी डीएमके को 59 AIADMK को 47 सीटों पर जीत मिली.
इसी के साथ एक्टर विजय की पार्टी नंबर वन पर रही. वहीं राज्य में कांग्रेस को 5 सीटों पर जीत मिली है और पीएमके को 4 सीट मिले हैं. वहीं पश्चिम बंगाल में प्रचंड जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी को केवल एक सीट मिली है. अब ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि एक्टर विजय किस पार्टी के समर्थन से सरकार बनाते हैं.
राज्य में सत्ता-विरोधी लहर तेज
तमिलनाडु में कुल 234 सीटें हैं, ऐसे में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी के पास 128 सीटें होनी चाहिए. टीवीके के पास अभी 108 सीटें हैं, ऐसें में सरकार बनाने के लिए उन्हें 10 सीटों की मदद चाहिए होगी. वहीं यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा है. पुरानी पार्टी के मंझे हुए नेताओं को अपनी सीट से हार मिली है.
जिसमें से एक नाम तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के स्टालिन का भी है. कोलाथुर, जिसे स्टालिन का गढ़ माना जाता था, वह उस सीट से हार गए. जिससे यह साफ हो गया कि राज्य में सत्ता विरोधी-लहर इतनी तेज थी कि उसमें अच्छे-अच्छे की साख उखड़ गई.