केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. केरल विधानसभा चुनाव की सभी 140 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इन चुनावों में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 63 सीटों पर अपना कब्जा जमाया. वह राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. इसके साथ ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है.
केरल के चुनावी इतिहास में यह नतीजा वामपंथी दलों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है. पिछले दो कार्यकालों से लगातार राज्य की सत्ता पर राज करने वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) को इस बार मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया है. चुनाव में मुख्य मुकाबला यूडीएफ और एलडीएफ के बीच ही था. इसमें एलडीएफ को भारी हार झेलनी पड़ी. सीपीएम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा और वह केवल 26 सीटों पर सिमट गई है. वहीं सीपीआई को भी मात्र 8 सीटों से संतोष करना पड़ा है.
कांग्रेस और सीपीएम के अलावा केरल चुनाव में उतरे अन्य राजनीतिक दलों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने बेहतरीन खेल दिखाया है. मुस्लिम लीग ने कुल 22 विधानसभा सीटों पर अपनी शानदार जीत दर्ज की है. इसके अलावा क्षेत्रीय दल केरल कांग्रेस के खाते में 7 सीटें गई हैं. वहीं रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने 3 सीटों पर सफलता प्राप्त की है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी भी केरल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाब रही है और उसने 3 सीटों पर अपना परचम लहराया है.
Thank you to my brothers and sisters in Keralam for a truly decisive mandate.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 4, 2026
Congratulations to every UDF leader and worker for a hard-fought, well-run campaign.
As I said before, Keralam has the talent, Keralam has the potential and now Keralam has a UDF government with a…
केरल विधानसभा चुनाव के यह नतीजे भारतीय राजनीति के पटल पर एक बड़े बदलाव का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं. वाम लोकतांत्रिक मोर्चे की इस हार के साथ भारत में वामपंथी राजनीति का एक युग समाप्त होता दिख रहा है. 1960 के दशक के बाद देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार ऐसा मौका आया है, जब भारत के किसी भी राज्य में वामपंथी दलों की सरकार सत्ता में नहीं होगी. केरल उनका अंतिम मजबूत गढ़ माना जाता था. अब वहां भी उनका प्रभाव पूरी तरह से खत्म हो गया है.
केरल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान कुल 883 उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे थे. राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों के लिए भारी संख्या में जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. केरल में सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को 71 सीटों के जादुई आंकड़े की जरूरत होती है. कांग्रेस नीत यूडीएफ ने इस आंकड़े को पार कर भारी अंतर से जीत दर्ज की है और राज्य में एक नई सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है.