एक दिन काम फिर तीन दिन आराम, चीन में बढ़ रहा 'वॉल-हैंगिंग यूथ' कल्चर

चीन में 'वॉल-हैंगिंग यूथ' शब्द ऐसे युवाओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनके पास स्थायी नौकरी और नियमित आमदनी नहीं है. कुछ युवा छोटे-मोटे काम करके कुछ दिनों का खर्च निकालते हैं और फिर काम से दूरी बना लेते हैं.

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Km Jaya

चीन में युवाओं के बीच 'वॉल-हैंगिंग यूथ' नाम का एक नया इंटरनेट टर्म चर्चा में है. इसका इस्तेमाल ऐसे युवाओं के लिए किया जा रहा है, जो स्थायी नौकरी और नियमित आमदनी के बिना जिंदगी चला रहे हैं. कुछ युवा छोटे-मोटे या पार्ट टाइम काम करके पैसे कमाते हैं और फिर कुछ दिनों तक काम से दूर रहते हैं. बाहर से देखने पर यह तरीका आलस जैसा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे बेरोजगारी, कम आमदनी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसी वजहें बताई जा रही हैं.

रिपोर्ट के अनुसार 'वॉल-हैंगिंग यूथ' चीन में इस्तेमाल किया जा रहा एक नया इंटरनेट टर्म है. यह उन युवाओं की स्थिति को दर्शाता है, जो पारंपरिक करियर और लगातार नौकरी करने वाली जिंदगी से किसी हद तक बाहर हैं. इनमें यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर चुके ऐसे युवा भी शामिल हैं, जिनके पास स्थायी नौकरी नहीं है. कुछ लोग पार्ट टाइम या छोटे काम करके अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, जबकि कुछ काम मिलने तक परिवार या दोस्तों के सहारे रहते हैं. उनकी जिंदगी में नियमित नौकरी, तय आमदनी और निश्चित करियर प्लान जैसी चीजें नहीं होती हैं.

एक दिन काम, फिर कई दिन आराम

इस ट्रेंड से जुड़ी एक चर्चा यह भी है कि कुछ युवा एक दिन काम करते हैं और अगले कुछ दिन 'लेट फ्लैट' रहते हैं. 'लेट फ्लैट' यानी लगातार काम और करियर की दौड़ से दूरी बनाकर कम जरूरतों के साथ जीवन बिताना. हालांकि, हर युवा के लिए इसकी वजह एक जैसी नहीं है. किसी के लिए यह अपनी पसंद की लाइफस्टाइल हो सकती है, जबकि किसी दूसरे के लिए बेरोजगारी या आर्थिक मजबूरी. परिवार का सहयोग, खर्च और स्थानीय रोजगार के अवसर भी उनकी स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं.


29 साल के गुओ की कहानी

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में 29 वर्षीय गुओ जिहाओ की कहानी का भी जिक्र किया गया है. दक्षिण चीन के शेनझेन शहर में रहने वाले गुओ एक समय बेहद मुश्किल आर्थिक स्थिति में पहुंच गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, कई महीनों तक 24 घंटे खुले रहने वाले बिलियर्ड हॉल उनके लिए अस्थायी ठिकाने की तरह बन गए थे. उस समय उनके पास केवल 20 युआन यानी करीब 3 अमेरिकी डॉलर बचे थे. गुओ के मुताबिक, उस दौर में परेशानी सिर्फ पैसों की नहीं थी, बल्कि हर मिनट मुश्किल हालात में गुजर रहा था.

पढ़ाई के बाद भी नहीं मिली स्थिरता

गुओ की कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था और उन्होंने इकोनॉमिक्स तथा मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी. डिग्री के बाद उनके सामने भी स्थायी नौकरी और बेहतर भविष्य का सामान्य सपना था. लेकिन पढ़ाई और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में अस्थिरता आई. यह कहानी इस बात की ओर भी ध्यान खींचती है कि डिग्री हासिल करना अपने आप में स्थायी रोजगार और आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं है.

क्या युवा सच में काम नहीं करना चाहते?

'वॉल-हैंगिंग यूथ' शब्द को देखकर ऐसा लग सकता है कि चीन के युवा काम से बचना चाहते हैं. लेकिन इस स्थिति को केवल आलस के नजरिए से देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता. स्थायी नौकरी की कमी, कम वेतन, बढ़ते खर्च और भविष्य को लेकर अनिश्चितता युवाओं के फैसलों को प्रभावित कर सकती है. कुछ युवा कम काम और कम खर्च वाली जिंदगी को अपनी पसंद के रूप में देखते हैं, जबकि कुछ के लिए छोटे-मोटे काम करना बेरोजगारी के बीच गुजारे का तरीका हो सकता है.

सोशल मीडिया ने दिया इस बदलाव को नाम

ऐसी जीवनशैली पहले भी मौजूद रही होगी, लेकिन सोशल मीडिया ने इसे 'वॉल-हैंगिंग यूथ' जैसा नाम देकर चर्चा में ला दिया है. यह टर्म उन युवाओं की स्थिति को सामने लाता है, जो न पूरी तरह पारंपरिक करियर की दौड़ में हैं और न ही पूरी तरह उससे बाहर.

इसके पीछे आर्थिक परिस्थितियों के साथ युवाओं की बदलती प्राथमिकताएं भी जुड़ी हो सकती हैं. कुछ युवा लगातार काम और प्रतिस्पर्धा से पैदा होने वाले दबाव को कम करना चाहते हैं, जबकि कुछ स्थायी अवसर नहीं मिलने के कारण इस तरह की जिंदगी जी रहे हैं.