West Bengal Assembly Election 2026 Assembly Election 2026

मरे हुए झींगों से लाल हुआ ओमान का समुद्र! किनारे पर बहकर आए लाखों-लाख झींगे; क्या यह किसी बड़े खतरे की घंटी?

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है. जिसमें ओमान के एक समुद्र के किनारे मरे हुए झींगों का बड़ा झुंड नजर आ रहा है.

X (@RT_hindi_)
Shanu Sharma

जलवायु परिवर्तन का असर धरती पर रह रहे सभी जीवों पर हो रहा है. कहीं तापमान अचानक बढ़ जा रहे हैं, तो कहीं बेमौसम बरसात के कारण पूरा इलाका डूब जा रहा है. इंसानों की करतूतों का असर बेजुबानों पर भी पड़ता रहा है. जिसका एक उदाहरण इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

वायरल हो रहे वीडियो में ओमान का एक समुद्र तट बेबी पिंक रंग का नजर आ रहा है. हालांकि यह कोई खूबसूरती नजारा नहीं बल्कि मरे हुए अनगिनत झींगों के समुद्र के किनारे पर बह कर आ जाने के कारण नजर आने वाले अजीब दृश्य है. इस वीडियो में एक व्यक्ति हाथों में झींगों को लेकर दिखा भी रहा है.

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

वायरल हो रहे वीडियो में एक समुद्र है. जो की हल्के पिंक या फिर लाल रंग का नजर आ रहा है. दूर से देखने में ऐसा लग रहा है जैसे की कोई नजारा हो, लेकिन जब वीडियो बना रहा व्यक्ति पास जाता है तो एक भयावह मंजर दिखता है. समुद्र के किनारे पर मरे हुए झींगों का विशाल झुंड दिख रहा है. वीडियो बना रहा व्यक्ति उसमें से कुछ झींगों को अपनी हाथों में उठाता है और उसे थोड़ा हिलाकर देखता है कि इसमें जान बची भी है या नहीं? लेकिन झींगों में थोड़ी भी जान नजर नहीं आती है.

क्या किसी बड़े खतरे का अलर्ट

मस्कट डेली के मुताबिक ओमान के एक मंत्रालय की ओर से कहा गया कि समुद्री जीव, खास कर झींगे जैसे छोटे जीव समुद्री स्थितियों में होने वाले बदलावों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं. समुद्र की गहराई में तापमान में अचानक बदलाव, घुली हुई ऑक्सीजन के स्तर में कमी और तेज समुद्री धाराएं के कारण वह शायद किनारे पर बह कर आ गए हों. एक विशेष टीम द्वारा इसकी जांच की जा रही है.

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस वीडियो पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी है. एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि व्यक्ति अपने हाथ में जिस तरह से झींगे को उठाता है, ऐसा लग रहा है, जैसे की रेत हो. वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि मुझे उम्मीद है कि यह एक सामान्य रूप से बार-बार होने वाली घटना हो, न कि किसी बड़े पर्यावरणीय संकट का संकेत हो.