पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव किसी रणक्षेत्र से कम नहीं है. बंगाल की हर सीट बहुत जरूरी है, लेकिन एक सीट ऐसी भी है, जो 4 मई को आ रहे रिजल्ट के बाद भी हार और जीत की वजह बन सकती है. इंडिया डेली की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से समझिए इनसाइड चुनावी गणित और जानिए क्यों टीएमसी और बीजेपी दोनों ने अपना पूरा दमखम इस सीट पर लगा दिया है.
यह सीट और कोई नहीं फाल्टा ही है. इस सीट पर मतदाताओं को डराने-धमकाने, बूथों के अंदर अनाधिकृत लोगों की मौजूदगी और संभावित छेड़छाड़ के आरोप सामने आए. इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने आदेश दिया कि दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 पोलिंग बूथों पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा. वहीं वोटों की गिनती 24 मई को होगी. 4 मई को 293 सीटों के रिजल्ट के बाद यह एक सीट हार और जीत के बीच की वजह बन सकती हैं.
अगर बंगाल में टाई या बेहद नजदीकी लड़ाई हुई तो फाल्टा अंतिम गणित बदल सकती हैं. बीजेपी इसे डायमंड हार्बर मॉडल बता रही है. वहीं टीएमसी आरोपों को खारिज कर रही है. कल के नतीजों में फाल्टा का वोट अभी गिना नहीं जाएगा.
फाल्टा में TMC के जहांगीर खान का मुकाबला BJP के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला से है. CPI(M) के शंभू नाथ कुर्मी भी चुनावी मैदान में हैं.
फाल्टा का सियासी महत्व बहुत बड़ा है. यह सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. डायमंड हार्बर टीएमसी के नंबर-2 नेता अभिषेक बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता है. फाल्टा इस किले का मेन गेट है. बीजेपी का सोचना है कि अगर फाल्टा में टीएमसी के वोट बैंक में सेंधमारी कर दी, तो इसका शोर पूरे बंगाल में सुनाई देगा.
फाल्टा का चुनाव सिर्फ एक विधायक चुनने का चुनाव नहीं है. यह सीट एक नैरेटिव सेट करेगी. बीजेपी यहां एग्रेसिव बैटिंग कर रही है, जबकि टीएमसी अपने डिफेंस को मजबूत कर काउंटर-अटैक के मूड में है. नतीजे चाहे जो भी हों, फाल्टा का स्कोरबोर्ड बंगाल की सियासत का सबसे लाउड मैसेज देने वाला है.