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'सांप, संपेरे, डॉक्टर और एंबुलेंस...' जगन्नाथ मंदिर रत्न भंडार खुलने से पहले क्यों हुए ये इंतजाम?

साल 1978. आखिरी बार, जगन्नाथ रत्न भंडार के कपाट खुले थे. करीब 46 साल बाद, दोबारा रत्न भंडार खुलने जा रहे हैं. ऐसा कहा जाता है कि मंदिर के रत्न भंडार में सांप ही सांप हैं, इस वजह से पहले कक्ष में संपेरों की ही एंट्री होगी. सांप पकड़ने में एक्सपर्ट लोगों के साथ-साथ मेडिकल टीम को भी तैनात किया गया है. अगर किसी को सांप काटता है तो उसे तत्काल एडमिट कराया जा सके. पढ़ें क्यों इस खजाने पर इतना सस्पेंस है.

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'सांप, संपेरे, डॉक्टर और एंबुलेंस...' जगन्नाथ मंदिर रत्न भंडार खुलने से पहले क्यों हुए ये इंतजाम?
Courtesy: Social Media

ओडिशा के पुरी स्थिति भगवान जगन्नाथ के मंदिर के रत्न भंडार के कपाट खुलने वाले हैं. मंदिर के कपाट 46 साल बाद खुल रहे हैं. साल 1978 में आखिरी बार ये कपाट खोले गए थे. यह मंदिर, ओडिशा के कानून मंत्रालय के अंतर्गत आता है. कपाट खुलने की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी. ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शनिवार को कहा था कि रत्न भंडार के दरवाजे को खेलने की प्रक्रिया रविवार से ही शुरू हुई है. मंदिर प्रबंधन समिति के प्रमुख अरविंद पाढी का कहना है कि साल 1905, 1926 और 1978 में रत्न भंडार खुले थे.

रत्न भंडार में कितने खजाने रखे गए हैं, क्या-क्या रखा गया है, उन सबकी सूची तैयार की गई है. मंदिर के रत्न भंडार को देखने के खास इंतजाम किए गए हैं. मंदिर समिति के सदस्यों के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक और पुरात्तव विभाग के भी अधिकारी मौजूद रहेंगे. 

रत्न भंडार, दोपहर 1 बजे से डेढ़ बजे के बीच में ही खुलेगा. रत्न भंडार के कपाट जैसे ही खुलेंगे, संपेरे सबसे पहले एंट्री लेंगे. रत्न भंडार से सांपों के फुफकारने की आवाज आती है. कहते हैं कि सांपों का समूह रत्न भंडार में रखे गए आभूषणों की रक्षा करता है. दो एक्सपर्ट संपेरे बुलाए गए हैं. डॉक्टर भी मौजूद हैं और एंबुलेंस भी लगाई गई है. कहते हैं ये सांप ही आभूषणों के रक्षक हैं. 

रत्न भंडार में है क्या?

जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुताबिक रत्न भंडार में तीन कक्ष बनाए गए हैं. आंतरिक कक्ष में 50 गिलो 600 ग्राम सोना और 134 किलोग्राम चांदी है. बाहरी कक्ष में 95 किलो सोना और 19 किलो चांदी है. वर्तमान कक्ष में 3 किलो सोना और 30 किलो चांदी है. रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के आभूषण रखे गए हैं. बाहरी भंडार, किसी त्योहार या रथ यात्रा के दौरान ही खोला जाता है. रत्न भंडार का सबसे भीतरी हिस्सा रहस्या है.

साल 1985 में आखिरी बार खुला था रत्न भंडार

रत्न भंडार, एक सदी से केवल 3 बार खुला है. साल 1905, 1926 और 1978 में. 1985 में जब दरवाजा खुला तो सामानों को देखकर रख दिया गया, उनकी लिस्ट ही अपडेट नहीं हो पाई. मंदिर के पास बेहिसाब संपत्ति है. इसे खोलने की मांग उठती रही है. 

रत्न भंडार की चाबी खो गई है

रत्न भंडारी की चाबी ही खो गई है. साल 2018 में ओडिशा हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं, जिसमें इसे खोलने के निर्देश दिए गए थे. एक टीम जांचने पहुंची लेकिन निराश लौटना पड़ा. रत्न भंडार की चाबी खो गई थी. साल 2018 की जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं हुई है.