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चंद्रमा को मिला नया 'जीवन', चमत्कारिक रूप से टली विशालकाय एस्टेरॉयड से विनाश वाली टक्कर, जानें कैसे हुआ करिश्मा

फरवरी 2026 में जुटाए गए नए डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि 2032 में ऐसी कोई घटना नहीं होगी. वैज्ञानिकों के अनुसार, एस्टेरॉयड 2024 YR4 का आकार और गति काफी बड़ी मानी जा रही थी.

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नई दिल्ली: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से एक राहत की खबर सामने आई है. वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि एस्टेरॉयड 2024 YR4 नाम का विशाल अंतरिक्षीय पत्थर साल 2032 में चंद्रमा से नहीं टकराएगा. नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के ताजा अवलोकनों के बाद इस संभावित खतरे को पूरी तरह खत्म मान लिया गया है.

दरअसल, 2024 के अंत में जब इस एस्टेरॉयड की खोज हुई थी, तब शुरुआती गणनाओं में यह आशंका जताई गई थी कि भविष्य में इसकी चंद्रमा से टक्कर हो सकती है. हालांकि, वैज्ञानिक पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि यह पृथ्वी से नहीं टकराएगा, लेकिन चंद्रमा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी.

सुरक्षित रहेगा चंद्रमा

अब फरवरी 2026 में जुटाए गए नए डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि 2032 में ऐसी कोई घटना नहीं होगी. वैज्ञानिकों के अनुसार, एस्टेरॉयड 2024 YR4 का आकार और गति काफी बड़ी मानी जा रही थी. अगर यह चंद्रमा से टकराता, तो वहां बड़ा गड्ढा बन सकता था. और साथ ही टक्कर से निकला मलबा अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स और चंद्र मिशनों के लिए खतरा पैदा कर सकता था.

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की अहम भूमिका

इस पूरे मामले में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की भूमिका बेहद अहम रही. जब इस टेलीस्कोप ने एस्टेरॉयड को ट्रैक किया, तब यह इतना धुंधला दिखाई दे रहा था कि उसकी तुलना पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी पर रखे एक छोटे बादाम को देखने से की गई. इसकी चमक इतनी कम थी कि यह मानव आंख से दिखाई देने वाले सबसे कमजोर तारे से भी अरबों गुना कम थी.

सही अनुमान लगाने में मदद

दुनिया के कई ग्राउंड टेलीस्कोप इस एस्टेरॉयड को ठीक से देख नहीं पाए थे, लेकिन जेम्स वेब की उन्नत तकनीक ने इसे दोबारा खोजकर उसकी सटीक स्थिति का पता लगाया. वैज्ञानिकों का कहना है कि अतिरिक्त महीनों के डेटा ने इसकी कक्षा का सही अनुमान लगाने में बड़ी मदद की.

यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह साबित हुआ है कि जेम्स वेब टेलीस्कोप भविष्य में अंतरिक्ष से आने वाले खतरों को पहचानने में अहम भूमिका निभा सकता है. इसे एक तरह से ग्रह सुरक्षा यानी 'प्लैनेटरी डिफेंस' के उपकरण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है

नासा का नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट क्या है?

भविष्य में नासा का नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट (NEO) सर्वेयर मिशन और नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप जैसे प्रोजेक्ट ऐसे खतरनाक एस्टेरॉयड की पहले से पहचान करने में मदद करेंगे. फिलहाल, वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा पूरी तरह सुरक्षित है और 2032 में किसी टक्कर की संभावना नहीं है.