नई दिल्ली: एच-1बी वीजा शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव भारतीय पेशेवरों के लिए चिंता बढ़ा सकता है. अमेरिका की ट्रंप सरकरा ने नए एच-1बी वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर शुल्क तय करने का प्रस्ताव रखा है. यह रकम भारतीय मुद्रा में करीब 95.71 लाख रुपये बैठती है. एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां तकनीक, इंजीनियरिंग, शिक्षा और शोध जैसे क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों को नौकरी देती हैं. इस कार्यक्रम में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, इसलिए असर बड़ा हो सकता है.
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग की ओर से यह प्रस्ताव सामने आया है. प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले लोगों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों तक सुझाव लिए जाएंगे.
अगर प्रस्ताव लागू होता है तो अमेरिका में बाहर से नए कुशल कर्मचारियों को बुलाने वाली कंपनियों की लागत बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. इसका सीधा असर भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य कुशल कर्मचारियों पर पड़ सकता है.
पहले एच-1बी वीजा से जुड़े शुल्क सामान्य तौर पर 2,000 से 5,000 डॉलर के बीच होते थे. प्रस्तावित 1,03,265 डॉलर की रकम इस पुराने शुल्क की तुलना में कई गुना अधिक है. इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेश से कर्मचारियों को नियुक्त करना महंगा हो सकता है. खासकर वे कंपनियां प्रभावित होंगी, जो भारतीय पेशेवरों को सीधे भारत से अमेरिका बुलाती हैं.
एच-1बी कार्यक्रम में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में करीब 70 प्रतिशत एच-1बी कर्मचारियों में भारतीय नागरिक शामिल थे.
इसके बाद चीन के नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत रही. ऐसे में शुल्क बढ़ने की स्थिति में भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिकी नौकरी बाजार में नई नियुक्तियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं.
प्रस्तावित शुल्क उन लोगों पर लागू नहीं होगा, जो पहले से अमेरिका में छात्र वीजा पर मौजूद हैं और बाद में एच-1बी वीजा प्राप्त करते हैं. मौजूदा एच-1बी वीजा के नवीनीकरण पर भी प्रस्तावित शुल्क लागू नहीं होगा. इसका मतलब है कि सबसे बड़ा असर उन विदेशी कर्मचारियों पर होगा, जिन्हें अमेरिका की कोई कंपनी विदेश से सीधे नियुक्त करके वहां बुलाना चाहती है.
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि एच-1बी कार्यक्रम का कुछ कंपनियां गलत इस्तेमाल करती हैं. उसका आरोप है कि कुछ नियोक्ता अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं. प्रशासन का मानना है कि ज्यादा शुल्क होने से कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने से पहले अमेरिकी उम्मीदवारों को प्राथमिकता देंगी.
हालांकि अमेरिकी कारोबारी संगठनों का कहना है कि एच-1बी कार्यक्रम से कंपनियों को कुशल कर्मचारियों की कमी दूर करने में मदद मिलती है. उनका मानना है कि अत्यधिक शुल्क से तकनीकी और विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में कंपनियों की भर्ती प्रभावित हो सकती है.
इस शुल्क को लेकर कानूनी विवाद पहले से चल रहा है. इससे पहले 1 लाख डॉलर के शुल्क को एक संघीय न्यायाधीश ने रोक दिया था. प्रशासन के अधिकार क्षेत्र को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए थे. अब 1,03,265 डॉलर शुल्क के नए प्रस्ताव पर भी कानूनी चुनौती की संभावना बनी हुई है. इसलिए अंतिम फैसला होने तक एच-1बी वीजा शुल्क को लेकर स्थिति बदल सकती है.