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'कुत्ते की तरह थक गया हूं, हर दिन...', डिलीवरी ब्वॉय ने रो-रोकर बयां किया अपना दर्द, वीडियो देखकर खौल जाएगा खून

अपनी परेशानी बताते हुए डिलीवरी ब्वॉय ने बीच में पढ़ाई छोड़ने पर गहरा अफसोस जताया. उसने कहा, “अगर मुझे एक और मौका मिले, तो मैं निश्चित रूप से मेहनत से पढ़ाई करूंगा, न कि इतनी कम उम्र में स्कूल छोड़ दूंगा.”

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'कुत्ते की तरह थक गया हूं, हर दिन...', डिलीवरी ब्वॉय ने रो-रोकर बयां किया अपना दर्द, वीडियो देखकर खौल जाएगा खून

चीन से एक डिलीवरी ब्वॉय का दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है जिसमें वह ड्यूटी के बीच बुरी तरह रो रहा है. वीडियो शेयर कर डिलीवरी ब्वॉय ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि कैसे उसे बुरी तरह से काम कराया जा रहा है. उसने यहां तक कहा कि वह काम करते-करते कुत्ता बन गया है.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

यह वीडियो गिग वर्कर्स की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को उजागर करता है. डिलीवरी ब्वॉय ने बताया कि कैसे उससे हर दिन बुरी तरह से काम लिया जाता है. शख्स ने कहा कि वह हर रोज़ 10 घंटे काम करता है, जिससे वह पूरी तरह थक जाता है. उसने रोते हुए कहा, “अब मैं रोज़ 10 घंटे खाना डिलीवर करता हूं, कुत्ते की तरह थक जाता हूं, और एक पल भी ढील नहीं बरत सकता, क्योंकि जैसे ही मैं रुकता हूं, ज़िंदगी मुझे भूखे पेट की सजा देती है. मैं चिंतित क्यों न होऊं?” 

पढ़ाई छोड़ने का पछतावा

ड्राइवर ने अपनी पढ़ाई के दौरान मेहनत न करने और स्कूल छोड़ने के फैसले पर गहरा अफसोस जताया. उसने कहा, “अगर मुझे एक और मौका मिले, तो मैं निश्चित रूप से मेहनत से पढ़ाई करूंगा, न कि इतनी कम उम्र में स्कूल छोड़ दूंगा.” उसने बताया कि उसने शिक्षकों की चेतावनियों को नजरअंदाज कर अपनी जिद में स्कूल छोड़ा था.

मैं अपने माता पिता को वो जिंदगी नहीं दे सका जिसके वे हकदार हैं

लगातार शारीरिक थकान और तनाव ने उसे अपने माता-पिता के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने से रोका. उसने कहा, “मैं अपने माता-पिता को वह ज़िंदगी नहीं दे सका, जिसके वे हकदार हैं. मैं खुद भी वह ज़िंदगी नहीं जी पा रहा, जैसी मैं चाहता हूं. यह मेरा दिल तोड़ता है. लेकिन मैं इसे किससे कहूं?”

 वायरल वीडियो पर क्या कह रहे लोग

इस डिलीवरी ब्वॉय की कहानी ने इंटरनेट यूजर्स को झकझोर दिया. पिछले साल, चीन में एक डिलीवरी ड्राइवर की 18 घंटे की शिफ्ट के बाद बाइक पर झपकी लेते समय मृत्यु हो गई थी. उसके दोस्तों ने बताया कि वह परिवार का इकलौता कमाने वाला था और कभी-कभी केवल 3 घंटे सो पाता था. यह कहानी गिग इकॉनमी की कठोर वास्तविकताओं को उजागर करती है.