'ऐप तो इंग्लिश में है...' मराठी में OTP बताते ही भड़का कैब ड्राइवर, यात्री से हुई तीखी बहस- VIDEO VIRAL

महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया जा रहा है. इसी बीच वायरल वीडियो में भाषा को लेकर यात्री और चालक के बीच बहस का मामला सामने आया है.

Meenu Singh

मुंबई में टैक्सी सेवा से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों खूब चर्चा में है, जिसमें मराठी भाषा को लेकर यात्री और ड्राइवर के बीच बहस होती दिखाई दे रही है. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी के व्यावहारिक ज्ञान को जरूरी करने की घोषणा की है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के अनुसार यह नियम 20 अगस्त से लागू होगा. हालांकि वायरल वीडियो की तारीख और स्थान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

OTP से शुरू हुई भाषा की बहस

वीडियो में आगे की सीट पर बैठा यात्री चालक से बात करने को कहता है. चालक उससे अंग्रेजी में बोलने के लिए कहता है. इसके बाद यात्री चार अंकों का ओटीपी मराठी में बताता है. चालक फिर नंबर दोहराने को कहता है और फोन डैशबोर्ड पर रखकर यात्री से खुद ओटीपी डालने को कहता है. इसके बाद बातचीत ऐप की भाषा और महाराष्ट्र में मराठी के इस्तेमाल को लेकर बहस में बदल जाती है.


चालक ने ऐप की भाषा पर उठाया सवाल

बहस के दौरान चालक यात्री से पूछता है कि ऐप अंग्रेजी में है या मराठी में. यात्री जवाब में महाराष्ट्र में वाहन चलाने और राज्य की ओर से लाइसेंस मिलने की बात कहता है. इसके बाद वह अपने मोबाइल से किसी व्यक्ति को फोन करता है और वीडियो समाप्त हो जाता है. घटना के दौरान दोनों के बीच तनाव साफ दिखाई देता है.

वायरल वीडियो की नहीं हुई पुष्टि

इस वीडियो को लेकर घटना की सटीक तारीख और स्थान की जानकारी सामने नहीं आई है. जिस ऐप आधारित टैक्सी में यह विवाद हुआ, उसका नाम भी स्पष्ट नहीं है. इसलिए वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा में आया. ऐसे में घटना से जुड़े दावों को पूरी तरह सत्यापित तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है.

टैक्सी चालकों पर लागू होगा नियम

महाराष्ट्र मोटर वाहन संशोधन नियमों के तहत ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया गया है. इसमें ओला, उबर और रैपिडो जैसी सेवाओं से जुड़े चालक भी शामिल हैं. नियम में एग्रीगेटर कंपनियों और उनके चालकों को कोई अलग छूट नहीं दी गई है. सरकार के इस फैसले का उद्देश्य राज्य में टैक्सी और ऑटो सेवाओं से जुड़े चालकों के लिए मराठी भाषा की समझ सुनिश्चित करना बताया गया है.