देश में रसोई गैस के इस्तेमाल को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव सामने आया है. सरकार PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस का दायरा बढ़ाने और उन क्षेत्रों में LPG पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जहां पाइपलाइन गैस की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है.
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जिन इलाकों या सोसायटियों में PNG नेटवर्क पहुंच चुका है, वहां उपभोक्ताओं को LPG के बजाय PNG कनेक्शन अपनाने के लिए कहा जा सकता है. ऐसे उपभोक्ताओं को नोटिस देकर निर्धारित समय में PNG कनेक्शन लेने का अवसर दिया जाएगा. नियमों के मुताबिक दोनों सुविधाओं को एक साथ रखने पर प्रतिबंध लागू हो सकता है और LPG कनेक्शन सरेंडर करना पड़ सकता है.
सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस आपूर्ति में बनी अनिश्चितता के बीच अहम माना जा रहा है. मध्य पूर्व में तनाव और ऊर्जा परिवहन से जुड़ी चुनौतियों के कारण आयात लागत प्रभावित हुई है. ऐसे माहौल में घरेलू गैस व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने और LPG पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है.
PNG विस्तार को गति देने के लिए तेल वितरण कंपनियों और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने की योजना है. जिलों में PNG कोऑर्डिनेशन कमेटियां बनाई जाएंगी और जिला आपूर्ति अधिकारी स्तर के अधिकारी को नोडल जिम्मेदारी दी जा सकती है.