नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में H1N1 संक्रमण के मामलों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था ने कोविड-19 पर भी नजर बढ़ा दी है. अस्पतालों से ILI और SARI मरीजों से जुड़ी जानकारी नियमित रूप से साझा की जा रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के तहत गंभीर श्वसन संक्रमण वाले मरीजों की कोविड जांच की व्यवस्था है. अधिकारियों का उद्देश्य किसी नई कोविड लहर की घोषणा करना नहीं, बल्कि H1N1, कोविड और दूसरे श्वसन संक्रमणों में असामान्य बढ़ोतरी का समय रहते पता लगाना है.
दिल्ली में H1N1 के मामले बढ़ने के बाद अस्पतालों में पहले से लागू निगरानी व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 29 मई 2025 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ILI, SARI और कोविड-19 की निगरानी के निर्देश दिए थे. इसके तहत सभी SARI मरीजों की कोविड जांच और ILI के पांच प्रतिशत मरीजों के नमूनों की जांच करने को कहा गया था.
कोविड-19 और H1N1 दोनों श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण हैं. दोनों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इसी वजह से केवल लक्षण देखकर यह तय करना मुश्किल होता है कि मरीज किस संक्रमण से प्रभावित है. खासकर गंभीर मरीजों में सही कारण जानने के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी होती है.
कोविड और H1N1 की जांच के लिए आमतौर पर नाक या गले से श्वसन नमूना लिया जाता है. आरटी-पीसीआर आधारित आणविक जांच के जरिए दोनों संक्रमणों की पहचान की जा सकती है. कोविड जांच में SARS-CoV-2 की आनुवंशिक सामग्री देखी जाती है, जबकि H1N1 में इन्फ्लुएंजा-A वायरस की पहचान होती है. मल्टीप्लेक्स आरटी-पीसीआर से एक नमूने में कई वायरस की पहचान संभव है.
अस्पतालों में सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी के कारण भर्ती मरीजों को SARI श्रेणी में रखा जाता है. ऐसे मरीजों की कोविड जांच व्यवस्था का हिस्सा है. 2025 के निर्देशों में सभी SARI और ILI के पांच प्रतिशत मामलों की कोविड जांच तथा संबंधित आंकड़ों को IDSP-IHIP पर दर्ज करने को कहा गया था. गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन, श्वसन सहायता और जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर की व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर है.
अस्पतालों को मरीजों की संख्या बढ़ने पर ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और जांच सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश हैं. IDSP के तहत मामलों में असामान्य बढ़ोतरी मिलने पर जिला और राज्य निगरानी इकाइयां स्थिति की समीक्षा करती हैं. जरूरत पड़ने पर रैपिड रिस्पांस टीम जांच के लिए भेजी जाती है. अधिकारियों के अनुसार कोविड निगरानी बढ़ने का मतलब दिल्ली में नई लहर आना नहीं है.