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समय पर प्रीमियम नहीं भरा तो आपके परिवार को पड़ सकता है भारी, जानें लाइफ इंश्योरेंस का नियम

लाइफ इंश्योरेंस की प्रीमियम समय पर जमा नहीं करने से पॉलिसी लैप्स हो सकती है और परिवार लाखों रुपये के डेथ क्लेम से वंचित रह सकता है. केवल रिवाइवल कोटेशन जारी होने का मतलब यह नहीं कि पॉलिसी सक्रिय हो गई है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
समय पर प्रीमियम नहीं भरा तो आपके परिवार को पड़ सकता है भारी, जानें लाइफ इंश्योरेंस का नियम
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: लाइफ इंश्योरेंस की एक प्रीमियम समय पर जमा न करने की गलती परिवार को लाखों रुपये के डेथ क्लेम से वंचित कर सकती है. महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के हालिया फैसले ने साफ किया है कि सिर्फ रिवाइवल कोटेशन जारी होने से पॉलिसी दोबारा सक्रिय नहीं मानी जाती. 

जब तक बीमा कंपनी पॉलिसी को औपचारिक रूप से दोबारा लागू यानी इन फोर्स घोषित नहीं करती, तब तक बीमा कवर प्रभावी नहीं माना जाएगा.

जानें ऐसा एक मामला?

एक मामले में पॉलिसीधारक की मृत्यु उस समय हुई जब बीमा कंपनी की ओर से रिवाइवल कोटेशन अभी भी वैध था. इसके बावजूद आयोग ने करीब 70 लाख रुपये के डेथ क्लेम को खारिज करने के फैसले को सही माना. हालांकि विशेष परिस्थितियों को देखते हुए पहले वर्ष में जमा किए गए लगभग 7 लाख रुपये का प्रीमियम लौटाने का निर्देश दिया गया.

ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद क्या होता है?

बीमा पॉलिसी में प्रीमियम की नियत तारीख निकलने के बाद कुछ समय का ग्रेस पीरियड मिलता है. इस दौरान भुगतान करने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा कवर जारी रह सकता है. लेकिन ग्रेस पीरियड समाप्त होने के बाद प्रीमियम जमा नहीं करने पर पॉलिसी लैप्स हो सकती है. कुछ पारंपरिक पॉलिसियां पेड अप स्थिति में चली जाती हैं, जबकि टर्म इंश्योरेंस में बीमा कवर पूरी तरह समाप्त हो सकता है.

रिवाइवल और एक्टिव पॉलिसी में क्या है अंतर?

लैप्स हुई पॉलिसी को दोबारा चालू कराने के लिए बकाया प्रीमियम, ब्याज और जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं. कई मामलों में मेडिकल जांच भी करानी पड़ सकती है. केवल रिवाइवल का संदेश, कोटेशन या भुगतान की जानकारी मिलने का मतलब यह नहीं है कि पॉलिसी फिर से सक्रिय हो गई है. हमेशा बीमा कंपनी से लिखित पुष्टि जरूर लें.

प्रीमियम मिस हो जाए तो क्या करें?

सबसे पहले अपनी पॉलिसी का स्टेटस जांचें. यदि ग्रेस पीरियड चल रहा है तो तुरंत प्रीमियम जमा करें. अगर पॉलिसी लैप्स हो गई है तो रिवाइवल की प्रक्रिया पूरी करें और उसके बाद लिखित रूप से पुष्टि प्राप्त करें कि पॉलिसी फिर से इन फोर्स हो गई है.

पॉलिसीधारकों के लिए जरूरी सलाह

ऑटो डेबिट सुविधा पर पूरी तरह निर्भर न रहें. बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें और मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी तथा बैंक विवरण हमेशा अपडेट रखें. अपने नॉमिनी को भी पॉलिसी नंबर, बीमा कंपनी का नाम और दस्तावेजों की जानकारी दें. समय पर प्रीमियम जमा करना और पॉलिसी की स्थिति नियमित रूप से जांचना ही बड़े डेथ क्लेम की सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद तरीका है.