नई दिल्ली: मार्च आते ही गर्मी ने दस्तक दे दी है और घरों में एसी, गीजर और वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल बढ़ गया है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बल्ब या पंखे ज्यादा चलाने से बिल बढ़ता है, लेकिन हकीकत ये है कि कुछ बड़े उपकरण चुपचाप सबसे ज्यादा यूनिट खपत करते हैं. इन तीन उपकरणों-एसी, वॉटर हीटर और वॉशिंग मशीन-की वजह से कई घरों का बिजली बिल अचानक दोगुना-तिगुना हो जाता है. अगर इनका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो महीने के आखिर में काफी बचत हो सकती है.
1.5 टन का सामान्य एसी 1500 से 2000 वॉट बिजली लेता है. अगर रोज 6-8 घंटे चलाया जाए और तापमान 22-23 डिग्री पर सेट किया जाए, तो कंप्रेसर लगातार चलता रहता है और यूनिट तेजी से बढ़ती हैं. इनवर्टर टेक्नोलॉजी वाला एसी कम खपत करता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तापमान 24-26 डिग्री पर रखें, कमरे के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें और फिल्टर नियमित साफ करें. इससे 20-30% तक बिजली बच सकती है.
एक सामान्य वॉटर हीटर या गीजर 2000 से 3000 वॉट की पावर लेता है. सर्दियों में रोज इस्तेमाल होने पर और पानी गर्म होने के बाद भी स्विच ऑफ न करने से बेवजह यूनिट बढ़ती रहती हैं. कई लोग 30-40 मिनट तक गीजर ऑन छोड़ देते हैं. बचत के लिए जरूरत जितना ही समय चलाएं, इंसुलेटेड टैंक वाला मॉडल चुनें और 5-स्टार रेटिंग वाले गीजर लें. इससे खपत काफी कम हो जाती है.
वॉशिंग मशीन की मोटर और हीटिंग एलिमेंट मिलकर अच्छी खासी बिजली खींचते हैं. हॉट वॉश या ड्रायर मोड चलाने पर खपत और बढ़ जाती है. रोज छोटे-छोटे लोड धोने से ज्यादा यूनिट खर्च होती हैं. बेहतर है कि कपड़े जमा करके फुल लोड में हफ्ते में 2-3 बार मशीन चलाएं. नॉर्मल या कोल्ड वॉश मोड चुनें और ड्रायर का कम इस्तेमाल करें. इससे बिल में अच्छी कटौती हो सकती है.
इन तीनों उपकरणों पर थोड़ा ध्यान देने से महीने के बिजली बिल में 500 से 1500 रुपये तक की बचत आसानी से हो सकती है. एसी का तापमान ज्यादा ठंडा न करें, गीजर को टाइमर पर सेट करें और वॉशिंग मशीन को फुल लोड में चलाएं. साथ ही 5-स्टार रेटिंग वाले नए मॉडल चुनने से लंबे समय में और फायदा होगा. छोटी-छोटी आदतें बदलकर घर का बजट संभाला जा सकता है.
मार्च से ही गर्मी बढ़ रही है, ऐसे में बिजली बचत के लिए एसी को दिन में 2-3 घंटे कम चलाएं, पर्दे बंद रखें और फैन के साथ एसी यूज करें. गीजर सिर्फ जरूरत पर ऑन करें और वॉशिंग मशीन को शाम के समय चलाएं जब बिजली की पीक कम हो. ये छोटे बदलाव बड़े फर्क लाते हैं और बिजली कंपनी के मीटर को भी खुश रखते हैं.