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व्यापार के मोर्चे पर भारत के लिए बुरी खबर, क्रूड ऑयल सप्लायर रुपए में भुगतान लेने को तैयार नहीं- रिपोर्ट

तेल मंत्रालय ने संसद की स्थाई समिति को यह जानकारी देते हुए कहा कि आपूर्तिकर्ताओं ने धन प्रत्यावर्तन और लेनदेन की ऊंची लागत को लेकर चिंता जताई है.

Sagar Bhardwaj
Edited By: Sagar Bhardwaj
व्यापार के मोर्चे पर भारत के लिए बुरी खबर, क्रूड ऑयल सप्लायर रुपए में भुगतान लेने को तैयार नहीं- रिपोर्ट

हाइलाइट्स

  • रुपए में भुगतान लेने को तैयार नहीं क्रूड ऑयल सप्लायर्स
  • उच्च लेनदेन लागत से जूझ रहीं भारतीय तेल कंपनियां

Business News: व्यापार के मोर्चे पर भारत के लिए बुरी खबर है. भारत को कच्चे तेल की सप्लाई करने वाली कंपनियां रुपए में भुगतान लेने को राजी नहीं हैं. संसदीय रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. तेल मंत्रालय ने संसद की स्थाई समिति को यह जानकारी देते हुए कहा कि आपूर्तिकर्ताओं ने धन प्रत्यावर्तन और लेनदेन की ऊंची लागत को लेकर चिंता जताई है.

गैर तेल उत्पादों के लिए कुछ देशों के साथ हो रहा रुपए में व्यापार

अंतरराष्ट्रीय व्यापार परंपरा के अनुसार कच्चे तेल का ज्यादातर व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है. हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने भारतीय मुद्रा का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए 11 जुलाई 2022 को आयातकों और निर्यातकों को रुपए में लेनदेन करने की अनुमति दी थी. इस पहल के तहत कुछ चुनिंदा देशों के साथ गैर तेल व्यापार उत्पादों का भुगतान रुपए में करने में तो सफलता मिली है लेकिन तेल आपूर्तिकर्ता इससे दूरी बनाए हुए हैं.

2022-23 में कच्चे तेल के लिए रुपए में कोई भुगतान नहीं

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने संसदीय समिति को मामले की जानकारी देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियों ने कच्चे तेल के आयात के लिए कोई भी भुगतान रुपए में नहीं किया. आपूर्तिकर्ता देशों ने रुपए को अपनी पसंदीदा मुद्रा में बदलने और इससे जुड़ी उच्च लेनदेन लागत और एक्सचेंज रेट के जोखिमों पर अपनी चिंता व्यक्त की है.

उच्च लेनदेन लागत से जूझ रहीं तेल कंपनियां

रिपोर्ट में बताया गया कि पब्लिक सेक्टर कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने कहा है कि उसे उच्च लेनदेन लागत का सामना करना पड़ा है क्योंकि क्रूड ऑयल के सप्लायर अतिरिक्त लेनदेन लागत का भार IOC पर डालते हैं. मंत्रालय ने कहा कि कच्चे तेल का भुगतान भारतीय मुद्रा में किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सप्लायरों को रेग्युलेट्री गाइडलाइंस का पालन करना होगा.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता

मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस समय रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और पब्लिक सेक्टर की पेट्रोलियम कंपनियों ने कच्चे तेल को रुपए में खरीदने के लिए कोई समझौता नहीं किया है. बता दें कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वह आयात पर निर्भर है.

भारत में प्रतिदिन 55-56 लाख बैरल तेल की खपत

मंत्रालय ने बताया कि भारत प्रतिदिन 55-56 लाख प्रति बैरल तेल की खबत करता है, जिसमें से प्रतिदिन 46 लाख बैरल तेल का आयात होता है जो दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 10 प्रतिशत है.