अब बिना सीमेंट की सस्ता सुंदर और टिकाऊ सिर्फ ईंट से बनेंगी दीवारें, जानें क्या है नई टेक्निक

वाटर एक्टिवेटेड इंटरलॉकिंग ब्रिक्स निर्माण क्षेत्र की ऐसी तकनीक हैं जिनमें ब्लॉक्स को विशेष डिजाइन के जरिए एक दूसरे में फिट किया जाता है. कुछ प्रणालियों में पानी के इस्तेमाल से बाइंडिंग प्रक्रिया सक्रिय होती है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: घर बनाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. जमीन के बाद सबसे ज्यादा खर्च निर्माण सामग्री और मजदूरी पर होता है. खासकर सीमेंट, रेत और अन्य सामग्री की कीमत बजट को काफी प्रभावित करती है. ऐसे में कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में सामने आई इंटरलॉकिंग ईंटों की तकनीक लोगों का ध्यान खींच रही है. 

इन ईंटों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि दीवार बनाने के लिए पारंपरिक तरीके से सीमेंट और रेत के मसाले की जरूरत कम या कुछ विशेष प्रणालियों में नहीं पड़ती.

क्या हैं वाटर एक्टिवेटेड इंटरलॉकिंग ब्रिक्स?

वाटर एक्टिवेटेड इंटरलॉकिंग ब्रिक्स ऐसी ईंटें या ब्लॉक हैं, जिन्हें एक दूसरे के साथ लॉक होने वाली संरचना के साथ तैयार किया जाता है. इनका डिजाइन ईंटों को सही जगह पर रखने और दीवार को तेजी से तैयार करने में मदद करता है. कुछ प्रणालियों में पानी के संपर्क के बाद विशेष सामग्री सक्रिय होकर ब्लॉक्स के बीच मजबूती बढ़ाने में मदद करती है.


हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर इंटरलॉकिंग ईंट केवल पानी डालने से पारंपरिक कंक्रीट की तरह मजबूत नहीं हो जाती. अलग अलग उत्पादों की निर्माण सामग्री, डिजाइन, बाइंडिंग सिस्टम और इस्तेमाल की विधि अलग हो सकती है. इसलिए किसी घर में इस्तेमाल से पहले निर्माता की तकनीकी जानकारी और इंजीनियर की सलाह जरूरी है.

कैसे तैयार होती है दीवार?

इंटरलॉकिंग ब्लॉक्स की सबसे बड़ी खासियत उनका डिजाइन है. सामान्य ईंटों की तरह इन्हें मोटी सीमेंट मोर्टार की परत से जोड़ने के बजाय ब्लॉक्स को एक दूसरे में फिट किया जाता है. इससे दीवार की लाइन और लेवल बनाए रखने में मदद मिलती है और निर्माण प्रक्रिया भी तेज हो सकती है.

कुछ वाटर एक्टिवेटेड सिस्टम में ब्लॉक्स लगाने के बाद पानी का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद विशेष बाइंडिंग सामग्री सक्रिय होकर ब्लॉक्स के बीच पकड़ मजबूत करती है. इस वजह से पारंपरिक ईंट और मोर्टार वाली दीवार की तुलना में काम का तरीका अलग हो जाता है.

सीमेंट और मजदूरी का खर्च हो सकता है कम

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा निर्माण समय और सामग्री की बचत से जुड़ा बताया जाता है. दीवारों के लिए मोर्टार की जरूरत कम होने पर सीमेंट और रेत की खपत घट सकती है. साथ ही ब्लॉक्स को इंटरलॉक करने के कारण काम तेजी से पूरा किया जा सकता है और कुछ परिस्थितियों में मजदूरी की लागत भी कम हो सकती है.

हालांकि, पूरे घर को बिना सीमेंट के बनाया जा सकता है, ऐसा दावा सही नहीं माना जाना चाहिए. घर की नींव, कॉलम, बीम और छत जैसी संरचनात्मक जरूरतों में डिजाइन के अनुसार कंक्रीट और स्टील जैसी सामग्री की आवश्यकता हो सकती है.