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8th Pay Commission: 9 घंटे की ड्यूटी का नियम, फिर 17 घंटे काम क्यों? जानें रेलवे कर्मचारियों की मांग

8वें वेतन आयोग को लेकर रेलवे कर्मचारियों की मांग अब सिर्फ वेतन और भत्तों तक सीमित नहीं है. लोको पायलट और रनिंग स्टाफ की लंबी ड्यूटी और ओवरटाइम भुगतान में देरी जैसे मुद्दे रखे गए हैं.

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Edited By: Reepu Kumari
8th Pay Commission: 9 घंटे की ड्यूटी का नियम, फिर 17 घंटे काम क्यों? जानें रेलवे कर्मचारियों की मांग
Courtesy: Pinterest

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग का नाम सुनते ही सरकारी कर्मचारियों के मन में सबसे पहले बढ़ी हुई सैलरी और भत्तों का ख्याल आता है. लेकिन रेलवे कर्मचारियों के लिए यह मामला इससे कहीं आगे बढ़ गया है. हालिया बैठक में कर्मचारियों से जुड़े ऐसे मुद्दे सामने आए, जिनका सीधा संबंध उनकी रोजमर्रा की ड्यूटी से है. लंबे काम के घंटे, ओवरटाइम का भुगतान और काम की परिस्थितियों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने अपनी चिंताएं रेलवे बोर्ड के सामने रखीं.

लोको पायलटों की लंबी ड्यूटी पर सवाल

ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन ने 8वें वेतन आयोग की बैठक में लोको पायलटों की ड्यूटी का मुद्दा उठाया. संगठन के अनुसार, जरूरत के नाम पर कर्मचारियों से 14, 16 और 17 घंटे तक ट्रेन चलवाना उचित नहीं है. जब निर्धारित ड्यूटी सीमा मौजूद है, तो उसका पालन होना चाहिए. AIRF ने लंबे काम के घंटों को केवल कर्मचारियों की थकान का विषय नहीं माना, बल्कि इसे ट्रेन संचालन की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया.

TA-OT का पैसा समय पर मिलने की मांग

बैठक में ट्रैवल अलाउंस और ओवरटाइम भुगतान में देरी की शिकायत भी सामने आई. AIRF के मुताबिक, रेलवे बोर्ड ने बताया कि करीब 2.90 लाख करोड़ रुपये के रेलवे बजट का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो चुका है. कर्मचारी संगठन ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारी लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो उनके वैध TA और OT का भुगतान समय पर क्यों नहीं किया जा रहा. संगठन के अनुसार, कर्मचारी की आय में भत्ते और ओवरटाइम भी अहम भूमिका निभाते हैं.

ट्रैकमैन के काम की सीमा घटाने की मांग

रेलवे के ट्रैकमैन की कार्य परिस्थितियों को लेकर भी कर्मचारी संगठन ने अपनी मांग रखी. AIRF चाहता है कि ट्रैकमैन से 12 किलोमीटर से अधिक का काम न लिया जाए. वहीं, पीवी मैनुअल में अधिकतम 20 किलोमीटर की सीमा का प्रावधान बताया गया है. संगठन का कहना है कि कुछ स्थानों पर कर्मचारियों के संघर्ष के बाद 12 किलोमीटर की व्यवस्था लागू भी की गई है. अब इसी सीमा को व्यापक रूप से लागू करने की मांग उठाई गई है.

रनिंग स्टाफ की ड्यूटी भी बनी बड़ा मुद्दा

रनिंग स्टाफ के काम के घंटों को लेकर भी बैठक में चिंता जताई गई. AIRF के अनुसार, रेलवे के एक आदेश में जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों से 11 घंटे तक लगातार काम लेने की बात है, जबकि कुछ परिस्थितियों में यह अवधि 12 घंटे तक हो सकती है. संगठन का दावा है कि कुछ जगहों पर कर्मचारियों से 17 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराई जा रही है. AIRF ने इसे कर्मचारियों और रेल संचालन, दोनों की सुरक्षा से जोड़कर देखा है.