menu-icon
India Daily

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की नई सैलरी कैसे तय होगी? बेसिक पे से पे लेवल तक समझें पूरा हिसाब

8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं. कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक पे 69,000 रुपये और 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है.

reepu
Edited By: Reepu Kumari
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की नई सैलरी कैसे तय होगी? बेसिक पे से पे लेवल तक समझें पूरा हिसाब
Courtesy: Pinterest

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग सिर्फ वेतन में बदलाव का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर उनके घरेलू बजट, बचत और रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है. कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि नई वेतन व्यवस्था में न्यूनतम बेसिक पे बढ़ाई जाए, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों को राहत मिल सके. इसी वजह से आयोग के सामने रखे जा रहे प्रस्तावों और वेतन से जुड़े तकनीकी शब्दों पर चर्चा तेज है.

नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड ने न्यूनतम बेसिक पे 69,000 रुपये करने और 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की है. 

बेसिक पे से तय होता है वेतन का आधार

बेसिक पे यानी मूल वेतन किसी कर्मचारी की सैलरी का मुख्य हिस्सा होता है. इसमें महंगाई भत्ता (DA) और मकान किराया भत्ता (HRA) शामिल नहीं होते. इन भत्तों की गणना लागू नियमों के अनुसार मूल वेतन को आधार बनाकर की जाती है. यही वजह है कि बेसिक पे में बदलाव होने पर कर्मचारी की कुल सैलरी पर भी असर पड़ सकता है.

ग्रेड पे की पुरानी व्यवस्था क्यों बदली?

ग्रेड पे की व्यवस्था छठे वेतन आयोग के दौरान लागू की गई थी. इसका इस्तेमाल कर्मचारियों के पद और वेतन ढांचे में उनकी स्थिति को समझने के लिए होता था. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती थी कि कोई कर्मचारी किस ग्रेड में आता है. लेकिन सातवें वेतन आयोग ने पुरानी ग्रेड पे व्यवस्था की जगह पे मैट्रिक्स लागू कर दिया.

इस बदलाव के बाद कर्मचारियों के वेतन स्तर और सालाना वेतन वृद्धि को व्यवस्थित तरीके से दिखाना आसान हुआ. इसलिए मौजूदा वेतन व्यवस्था को समझते समय केवल ग्रेड पे पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है. अब पे लेवल और पे मैट्रिक्स की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है.

पे लेवल बताता है कर्मचारी किस स्तर पर है

सातवें वेतन आयोग में 18 स्तरों वाला पे मैट्रिक्स लागू किया गया. इसमें हर कर्मचारी का पे लेवल उसकी वेतन स्थिति को दर्शाता है. प्रत्येक स्तर पर बेसिक पे की अलग-अलग सीढ़ियां होती हैं, जिनके आधार पर वेतन वृद्धि का हिसाब लगाया जाता है.

उदाहरण के तौर पर, सातवें वेतन आयोग में लेवल 1 का शुरुआती बेसिक पे 18,000 रुपये था, जबकि लेवल 7 का शुरुआती मूल वेतन 44,900 रुपये निर्धारित किया गया था. आसान शब्दों में कहें तो पे लेवल कर्मचारी का वेतन स्तर बताता है, जबकि बेसिक पे उसकी मौजूदा मूल वेतन राशि होती है.

फिटमेंट फैक्टर से कैसे निकलेगी नई बेसिक पे?

फिटमेंट फैक्टर एक गुणक है, जिसका इस्तेमाल पुराने मूल वेतन से संशोधित बेसिक पे की गणना करने में किया जा सकता है. कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. तुलना करें तो छठे वेतन आयोग में 1.86 और सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर किया गया था.

हालांकि, 3.833 का आंकड़ा अभी प्रस्ताव है, स्वीकृत नियम नहीं. नई बेसिक पे और कुल सैलरी का वास्तविक हिसाब अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा. केवल फिटमेंट फैक्टर देखकर हाथ में आने वाली रकम का सटीक अनुमान लगाना सही नहीं होगा, क्योंकि भत्तों, कटौतियों और नए वेतन ढांचे का भी असर पड़ेगा.