आज के समय में स्मार्टफोन केवल कॉल करने का साधन नहीं, बल्कि बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, सोशल मीडिया और निजी दस्तावेजों का भी केंद्र बन चुका है. ऐसे में फोन की सुरक्षा को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है. कई लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका फायदा साइबर अपराधी आसानी से उठा लेते हैं. यदि कुछ जरूरी डिजिटल आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए, तो ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
कई लोग मोबाइल, ईमेल और बैंकिंग ऐप के लिए आसान पासवर्ड रखते हैं. जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या 123456 जैसे पासवर्ड आसानी से अनुमान लगाए जा सकते हैं. हमेशा मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें, जिसमें अक्षर, अंक और विशेष चिन्ह शामिल हों.
SMS, ईमेल या मैसेजिंग ऐप पर आने वाले हर लिंक पर भरोसा नहीं करना चाहिए. कई बार साइबर अपराधी नकली लिंक भेजकर लोगों की निजी जानकारी और बैंकिंग विवरण चुरा लेते हैं. किसी भी लिंक को खोलने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें.
फोन का सॉफ्टवेयर और ऐप्स अपडेट करना केवल नए फीचर पाने के लिए नहीं होता. नए अपडेट में सुरक्षा से जुड़ी कमियों को भी ठीक किया जाता है. यदि लंबे समय तक अपडेट नहीं किया जाता, तो डिवाइस साइबर हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है.
कई ऐप जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगते हैं. कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन और कॉन्टैक्ट्स जैसी अनुमतियां केवल उन्हीं ऐप्स को दें, जिन पर भरोसा हो. समय-समय पर फोन की ऐप परमिशन की समीक्षा करना भी अच्छी आदत है.
फ्री पब्लिक Wi-Fi का उपयोग करते समय बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान या संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना चाहिए. ऐसे नेटवर्क हमेशा सुरक्षित नहीं होते. यदि जरूरी काम करना हो, तो केवल विश्वसनीय और सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग करें.