नई दिल्ली: लैपटॉप पर अगर आप काम करते हैं तो आपके मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि क्या फोन चार्जर से लैपटॉप को चार्ज करना सेफ रहता है या नहीं. कई बार जब लैपटॉप की बैटरी खत्म हो जाती है या फिर खत्म होने के कगार पर होती है तो लोग उसे फोन के चार्जर से चार्ज करने लगते हैं. आपने भी कभी न कभी यह जरूर किया होगा, लेकिन क्या यह सुरक्षित है? आइए समझते हैं इसके पीछे का पूरा गणित.
सबसे पहले समझते हैं कि फोन चार्जर और लैपटॉप चार्जर में क्या अंतर है. फोन चार्जर आमतौर पर 5V से 20V तक 10-25 वॉट पावर देते हैं. वहीं, लैपटॉप चार्जर 45 वॉट, 65 वॉट, 90 वॉट या उससे भी ज्यादा पावर देते हैं. लैपटॉप को ज्यादा बिजली की जरूरत होती है क्योंकि उसका प्रोसेसर, स्क्रीन और अन्य पार्ट्स बड़े होते हैं.
ज्यादातर मामलों में इसे सुरक्षित नहीं माना जाता है. अगर आपको कोई इमरजेंसी है, तो आप लैपटॉप को फोन चार्जर से चार्ज कर सकते हैं, लेकिन इससे लैपटॉप काफी स्लो चार्ज होता है. हालांकि, इससे कई समस्याएं हो सकती हैं:
स्लो चार्जिंग: फोन चार्जर से लैपटॉप पूरी तरह चार्ज होने में 6-8 घंटे या उससे ज्यादा समय लग सकता है.
ओवरहीटिंग: फोन चार्जर लैपटॉप की जरूरत पूरी नहीं कर पाता, जिससे चार्जर और बैटरी दोनों गर्म हो जाते हैं.
बैटरी खराब होना: लंबे समय तक अगर आप यह प्रैक्टिस करते हैं तो लैपटॉप की बैटरी खराब हो सकती है.
आग लगने का खतरा: बहुत कम मामलों में चार्जर ओवरलोड होने से आग लग सकती है.
लैपटॉप को नुकसान: मदरबोर्ड या अन्य पार्ट्स खराब हो सकते हैं.
इस स्थिति को केवल इमरजेंसी के लिए ही रखें. केवल 10 से 15 मिनट के लिए ही ऐसा करें.
अगर आपका फोन चार्जर USB-C PD (Power Delivery) वाला है और लैपटॉप भी PD सपोर्ट करता है तो थोड़ा बेहतर है, लेकिन फिर भी ओरिजिनल चार्जर जितना अच्छा नहीं.
हमेशा लैपटॉप के ओरिजिनल चार्जर या उसी ब्रांड का कम्पेटिबल चार्जर इस्तेमाल करें.
अगर ओरिजिनल चार्जर खराब हो जाए तो सर्टिफाइड 65W/90W USB-C PD चार्जर खरीदें.
पावर बैंक चुनते समय भी देखें कि वह लैपटॉप को सपोर्ट करता हो या नहीं.