'कोई भेदभाव नहीं, सब होते हैं इस हैकर के शिकार..' इन तरीकों से अभी हो जाएं सावधान
रैनसमवेयर वाले हैकर्स किसी भी यूजर या किसी भी ऑर्गेनाइजेशन पर अटैक करके उनके कंप्यूटर पर फाइलों के एक्सेस को रोक देता है और फिर उन फाइलों को एन्क्रिप्ट करके 'डिस्क्रिप्शन की' के लिए लाखों की फिरौती की मांग करता है. अब खबर आ रही है कि इस तरह के हैकर्स उन लोगों को भी आसानी से शिकार बनाता है जिन्हें कंपनी धोखाधड़ी मामले में निकाल देती है क्योंकि इस गिरोह के पास उन लोगों का पूरा डाटा रहता है.
हैकर्स हर दिन लोगों की चुनौतियां बढ़ाते जा रहे हैं. पता नहीं कब, कौन और कहां इसके शिकार हो जाएं. ऐसे में अब खबर आ रही है कि रैनसमवेयर गिरोह पीड़ितों से पैसे ऐंठने के लिए तेजी से अपना जाल फैला रहा है. खबर है कि हैकर्स चुराए गए डेटा को अब अपना हथियार बना रहा है. इस तरह के हैकर्स न केवल संगठनों को बल्कि उनसे जुड़े व्यक्तियों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है. दरअसल MGM कैसीनो ब्रीच के मद्देनजर सोफोस ने रैनसमवेयर गिरोहों को लेकर मीडिया से बातचीत बताया कि इस तरह के हैकर कंपनी उसमें काम करने वाले लोग, या फिर ऐसे जो खुद कुछ काम करते हैं उन्हें ब्लैकमेल करने का काम कर रहे हैं.
साइबर सिक्योरिटी कंपनी सोफोस में थ्रेट रिसर्च के निदेशक क्रिस्टोफर बड ने कहा, 'इसमें गिरोह बिजनेस मैन को निशाना बना रहा है, जिसे रैनसमवेयर हमला के आरोप में जिम्मेदार माना जाता हैं. इस तरह के लोग इन गिरोहों का सॉफ्ट टारगेट होता है क्योंकि उनपर पहले से ही आरोप लगा रहता है.'
क्या होता है रैनसमवेयर अटैक?
रिपोर्ट के मुताबिक ये रैनसमवेयर ग्रुप चोरी की गई जानकारी का लाभ उठाकर पीड़ितों को सार्वजनिक रूप से अपमानित और परेशान करता है. इतना ही नहीं इसमें हैकर्स किसी भी व्यक्ति को पर्सनल अटैक से लेकर मुकदमा करने तक की धमकी देता है.
रैनसमवेयर वाले हैकर्स किसी भी यूजर या किसी भीऑर्गेनाइजेशन पर अटैक करके उनके कंप्यूटर पर फाइलों के एक्सेस को रोक देता है और फिर उन फाइलों को एन्क्रिप्ट कर देता है, जिसके बाद डिस्क्रिप्शन की के लिए फिरौती की मांग करता है इसलिए इसे रैंसमवेयर का नाम दिया गया है.इसके शिकार लोग अपना जरूरी डेटा को हासिल करने के लिए लोग या कोई कंपनी पैसा देने के लिए तैयार हो जाती है. जिस कारण से यह खतरा और बढ़ता ही जा रहा है.
रैनसमवेयर के कई वर्जन
रैनसमवेयर के कई वर्जन है जो किसी भी तरह के धोखे धारी को आसानी से अंजाम तक पहुंचा सकता है. इसके सबसे अधिक शिकार आईटी सेक्टर और बैंक वाले होते हैं.
रयूक: इसमें एक वर्जन है, जो स्पीकर स्पीयर फिशिंग ईमेल से या रिमोट डेस्कटॉप प्रोटोकॉल (RDP) का उपयोग करके एंटरप्राइज़ सिस्टम में लॉग इन करने के लिए कॉम्प्रोमाइज यूजर क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके भेजा जाता है. बता दें कि रयूक सबसे महंगे रैंसमवेयर में से एक है, जिसमें औसतन 1 मिलियन डॉलर से अधिक की मांग की जाती है.
Maze: रैंसमवेयर फाइल एन्क्रिप्शन और डाटा चोरी को एक साथ अंजाम देने वाला पहला रैंसमवेयर वर्जन है. जब टार्गेट कंपनी या यूजर फिरौती देने से इनकार करता है तो Maze पीड़ितों के कंप्यूटरों को एन्क्रिप्ट करने से पहले संवेदनशील डाटा को चुराना शुरू कर देता है.इसके बाद इस डाटा की बोली लगती है और सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को बेच दिया जाता है. इसके अलावा REvel, लॉकबिट, Lapsus$ और डियर क्राई जैसे कुछ रैंसमवेयर है, जिसने लोगों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है.
रेसवेयर अक्सर फिशिंग ईमेल का इस्तेमाल करके किसी कंपनी या लोगों को अपना शिकार बनाता है. इससे बचने के लिए क्या करें और क्या ना करें..देखिए
- आप अपना डेटा का बैकअप लेते ले कर अलग से रख लिया करें.
- पैंचिग भी रैंसमवेयर हमलों के खिलाफ बचाव में एक जरूरी एलिमेंट है.
- अपने डिवाइस की सिक्योरिटी पैच को हमेशा अपडेट करते रहें.
- ऐसे ईमेल जो फ्राउड या अननोन लगे तो उस पर क्लिक ना करें.
- किसी भी अनजान लिंक को क्लिक करने से पहले कई बार सोचा.
- किसी भी लिंक पर अपनी या कंपनी की जानकारी साझा करने से बचें.