T20 World Cup 2026

'धर्म की आड़ में हो रही साजिश', तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को ग्रैमी अवार्ड मिलने पर चीन को क्यों लगी मिर्ची?

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को उनके एल्बम 'मेडिटेशन' के लिए ग्रैमी पुरस्कार मिला है. चीन ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अपने खिलाफ एक राजनीतिक साजिश और अलगाववादी गतिविधियों का हिस्सा बताया है.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने इतिहास रच दिया है. उनके बोले गए शब्दों वाले एल्बम 'मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा' को सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक श्रेणी में विजेता घोषित किया गया. जहां दुनिया भर में उनके शांति और करुणा के संदेश की सराहना हो रही है, वहीं चीन ने इस सम्मान पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. बीजिंग ने इस पुरस्कार को महज एक राजनीतिक हथकंडा करार दिया है.

दलाई लामा का यह एल्बम उनके 90 वर्ष के लंबे जीवन के अनुभवों और मानवीय मूल्यों का एक अद्भुत डिजिटल संगम है. इसमें दिमागी शांति, वैश्विक सद्भाव और भाईचारे की शिक्षाओं को संगीत के सुरों के साथ खूबसूरती से पिरोया गया है. इस परियोजना में दुनिया के कई प्रसिद्ध कलाकारों ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया है. ग्रैमी की इस श्रेणी में उनका कड़ा मुकाबला ट्रेवर नूह और अमेरिकी जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन जैसी बड़ी वैश्विक हस्तियों के साथ था.

चीन का विरोध और आरोप 

बीजिंग ने सोमवार को इस अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार की कड़ी निंदा करते हुए इसे चीन विरोधी गतिविधियों का समर्थन करने वाला कदम बताया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक विशेष मीडिया ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि वे इस मान्यता का पुरजोर विरोध करते हैं. उन्होंने तर्क दिया कि दलाई लामा विशुद्ध रूप से धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे धर्म के नाम पर अलगाववादी राजनीति कर रहे हैं. चीन ने अंतरराष्ट्रीय शक्तियों को इस पर सख्त चेतावनी दी है.

राजनीति और धर्म का विवाद 

प्रवक्ता लिन जियान ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि दलाई लामा एक राजनीतिक निर्वासित व्यक्ति हैं. उनका मुख्य उद्देश्य तिब्बत को चीन से अलग कर एक विशेष एजेंडा चलाना है. बीजिंग का मानना है कि ग्रैमी अवॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों का उपयोग चीन की संप्रभुता को वैश्विक स्तर पर चुनौती देने के लिए एक हथियार के रूप में किया जा रहा है. यह विवाद स्पष्ट करता है कि तिब्बत का मुद्दा चीन के लिए कितना रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व रखता है.

दलाई लामा का ऐतिहासिक सफर 

दलाई लामा का जीवन संघर्ष और अहिंसक क्रांति की एक बहुत लंबी यात्रा रहा है. साल 1959 में चीनी शासन के खिलाफ तिब्बत में हुए असफल विद्रोह के बाद उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा था. तब से वे भारत में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं और यहीं से तिब्बती बौद्ध धर्म का नेतृत्व कर रहे हैं. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता होने के नाते वे दशकों से वैश्विक शांति की वकालत कर रहे हैं. उनके इस प्रभावशाली संघर्ष ने उन्हें दुनिया भर में एक महान पहचान दी है.