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AI न इंसानों की जगह लेगा, न नौकरियां पूरी तरह खत्म करेगा, माइक वॉल्श ने बताया AI का भविष्य

फ्यूचरिस्ट माइक वॉल्श ने AI के भविष्य, डिजिटल कर्मचारियों, नौकरियों और इंसानी जिम्मेदारी पर विचार रखे. उन्होंने एंट्री-लेवल नौकरियों के घटने को गंभीर खतरा बताया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
AI न इंसानों की जगह लेगा, न नौकरियां पूरी तरह खत्म करेगा, माइक वॉल्श ने बताया AI का भविष्य
Courtesy: X

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य में मशीनें इंसानों की नौकरियां छीन लेंगी और उनकी जगह काम करने लगेंगी? NDTV World Summit में फ्यूचरिस्ट माइक वॉल्श ने इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि AI को केवल नौकरी छीनने वाली तकनीक के रूप में देखना सही नहीं है. उनके मुताबिक, दुनिया ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां ज्ञान, विशेषज्ञता और बौद्धिक क्षमता पहले से कहीं ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध होगी. उन्होंने यह भी संभावना जताई कि कुछ युवा भारतीय अपनी पहली नौकरी पाने से पहले ही अपना पहला डिजिटल कर्मचारी नियुक्त कर सकते हैं.

कमी से बहुतायत की दुनिया में पहुंचेगी तकनीक

वॉल्श के मुताबिक, AI को लेकर मौजूदा बहस अक्सर संसाधनों की कमी और भविष्य की अनिश्चितता पर केंद्रित रहती है. लोग सवाल करते हैं कि डेटा सेंटरों के लिए पर्याप्त बिजली और पानी उपलब्ध होगा या नहीं, AI से प्रभावित कर्मचारियों को नए रोजगार मिलेंगे या नहीं और संस्थान इस बदलाव के साथ कितनी तेजी से खुद को ढाल पाएंगे.

उन्होंने कहा कि दुनिया धीरे-धीरे कमी की सोच से निकलकर बहुतायत की ओर बढ़ रही है. ऐसी दुनिया में ज्ञान और विशेषज्ञता तक पहुंच आसान होगी. हालांकि, जब लगभग हर व्यक्ति और कंपनी के पास समान बौद्धिक क्षमता वाले AI उपकरण होंगे, तब असली अंतर इस बात से पैदा होगा कि कोई व्यक्ति उस तकनीक को किस तरह निर्देश देता है और उससे काम कैसे करवाता है.

चैटबॉट नहीं, डिजिटल कर्मचारी हैं AI का अगला चरण

वॉल्श ने कहा कि AI को केवल सवालों के जवाब देने वाले चैटबॉट के रूप में देखना इसकी वास्तविक क्षमता को सीमित करके समझना है. उनके अनुसार, अगला बड़ा बदलाव डिजिटल लेबर यानी ऐसे AI एजेंटों का होगा, जो तय सीमाओं के भीतर निर्णय लेकर किसी काम को पूरा कर सकेंगे.

इसका मतलब है कि AI केवल जानकारी नहीं देगा, बल्कि अलग-अलग चरणों वाले काम भी संभाल सकेगा. कंपनियों में इसका इस्तेमाल प्रबंधन, ग्राहक सेवा और रोजमर्रा के संचालन में बढ़ सकता है. ऐसे माहौल में लोगों की भूमिका केवल काम करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें तकनीक को सही दिशा देने और परिणामों की जिम्मेदारी संभालने पर भी ध्यान देना होगा.

AI बनेगा कामकाज का नया इंटरफेस

वॉल्श ने चीन के शंघाई स्थित KFC का उदाहरण देते हुए बताया कि AI कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच कामकाज का नया माध्यम बन सकता है. उनके बताए उदाहरण में मैनेजर ईयरबड के जरिए AI से निर्देश प्राप्त करता है. सिस्टम CCTV के आधार पर उसे बता सकता है कि रसोई में कर्मचारियों की कमी है या किसी खास खाद्य पदार्थ का स्टॉक मंगाना है. मैनेजर निर्देश की पुष्टि करके कार्रवाई कर सकता है.

उन्होंने दवा कंपनी Sanofi का भी उदाहरण दिया, जहां उनके मुताबिक AI नर्स के जरिए रोजाना करीब 10 लाख मरीजों से फोन पर संपर्क किया जा रहा है. भारत की हेल्थकेयर कंपनी Portea का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नर्सों की कमी के बीच AI एजेंट ने 10,000 लोगों को फोन करके कर्मचारियों की भर्ती में मदद की. ये उदाहरण बताते हैं कि AI का इस्तेमाल केवल डिजिटल बातचीत तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर संपर्क और संचालन के लिए भी हो सकता है.

रोबोट अब वास्तविक दुनिया में भी बढ़ाएंगे दखल

वॉल्श ने कहा कि AI का अगला महत्वपूर्ण क्षेत्र भौतिक दुनिया में काम करने वाले रोबोट होंगे. उन्होंने Waymo की सेल्फ-ड्राइविंग कारों का उदाहरण दिया, जिन्हें पहियों पर चलने वाले रोबोट की तरह समझा जा सकता है. दिल्ली के ट्रैफिक का जिक्र करते हुए उन्होंने मजाक में कहा कि अगर कोई सेल्फ-ड्राइविंग कार यहां सफलतापूर्वक चल जाए, तो वह मशीन की असाधारण क्षमता का प्रमाण होगा.

उन्होंने सुरक्षा क्षेत्र में रोबोट के इस्तेमाल और जापान के 7-Eleven स्टोरों में टेली-ऑपरेटेड रोबोट का भी उल्लेख किया. उनके मुताबिक, कुछ रोबोट फिलीपींस स्थित Ghost Operation Center से संचालित किए जा रहे हैं, जहां पहले कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग अब रोबोट को प्रशिक्षित करने जैसे कार्य कर सकते हैं. इससे संकेत मिलता है कि तकनीक कुछ भूमिकाओं को समाप्त करने के साथ नए प्रकार के काम भी पैदा कर सकती है.

AI एजेंट बदल सकते हैं खरीदारी और भुगतान का तरीका

वॉल्श के अनुसार, आने वाले समय में AI एजेंट लोगों की ओर से बिजली के बिल, सब्सक्रिप्शन और अन्य सेवाओं के लिए बेहतर विकल्प खोजने तथा शर्तों पर बातचीत करने में मदद कर सकते हैं. उन्होंने अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार विजेता हर्बर्ट साइमन की ‘बाउंडेड रेशनलिटी’ की अवधारणा का हवाला दिया. इस विचार के मुताबिक, समय और जानकारी की सीमाओं के कारण लोग हमेशा सबसे बेहतर विकल्प नहीं चुन पाते.

अगर AI एजेंट इन कामों को स्वचालित ढंग से करने लगें, तो उपभोक्ताओं के लिए समय और पैसे बचाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. वॉल्श ने भारत में UPI के संदर्भ में यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल का भी जिक्र किया, जिसके जरिए AI एजेंट छोटे भुगतान कर सकेंगे. हालांकि, ऐसे सिस्टम के व्यापक इस्तेमाल के लिए सुरक्षा, अनुमति और जवाबदेही जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे.

भारत को केवल काम के घंटे बेचने से आगे बढ़ना होगा

जब उनसे पूछा गया कि अगर कंपनियां डिजिटल कर्मचारियों पर निर्भर होने लगीं, तो लाखों युवाओं की नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा. कंपनियों को लागत घटाने का फायदा मिल सकता है, लेकिन कर्मचारियों और आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब होगा?

जवाब में वॉल्श ने भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) क्षेत्र का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से केवल इनवॉइस जांचने जैसे दोहराव वाले काम कराना या उनके काम के घंटों के आधार पर सेवाएं बेचना उनकी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल नहीं है. उनके मुताबिक, भारत को केवल मानव श्रम के घंटे उपलब्ध कराने के बजाय काम के नतीजों और AI एजेंटों के संचालन पर भी ध्यान देना चाहिए.

एंट्री-लेवल नौकरियों में कमी सबसे बड़ा खतरा

वॉल्श ने स्पष्ट किया कि नौकरी को केवल अलग-अलग कामों का समूह मानना सही नहीं है. उनके मुताबिक, नौकरी में जिम्मेदारी भी शामिल होती है. उन्होंने स्ट्रक्चरल इंजीनियर का उदाहरण देते हुए कहा कि कंप्यूटर किसी पुल की संरचना से जुड़े कई काम बेहतर तरीके से कर सकता है, लेकिन अंतिम मंजूरी देने और जिम्मेदारी उठाने में इंसान की भूमिका अहम बनी रह सकती है.

हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि AI के कारण एंट्री-लेवल नौकरियां घटना एक गंभीर समस्या बन सकती है, खासकर भारत के IT क्षेत्र में. इन पदों पर काम करके युवा अनुभव हासिल करते हैं और भविष्य में नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार होते हैं. यदि कंपनियां शुरुआती स्तर के काम पूरी तरह स्वचालित कर देती हैं, तो लागत कम होने के बावजूद अगली पीढ़ी के पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के अवसर घट सकते हैं.

गंभीर फैसलों में इंसानी भूमिका क्यों जरूरी है?

जब वॉल्श से पूछा गया कि AI एजेंट हर क्षेत्र में काम करने लगेंगे, तो इंसानों की जरूरत क्यों रहेगी, उन्होंने सामाजिक मूल्यों और मानवीय समझ की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने उदाहरण दिया कि यदि AI किसी गंभीर बीमारी का सही निदान कर दे, तब भी मरीज चाहेगा कि डॉक्टर उससे बात करे और स्थिति को समझाए.

उनके मुताबिक, AI को बहुत सारी जानकारी सिखाई जा सकती है, लेकिन उसने इंसानों की तरह वास्तविक दुनिया में जीवन नहीं जिया है और न ही उसके फैसलों के व्यक्तिगत परिणाम होते हैं. इसलिए उन्होंने इस धारणा पर सवाल उठाया कि AI भविष्य में किसी तरह का डिजिटल देवता बन जाएगा.

वॉल्श ने अंत में आगाह किया कि महत्वपूर्ण फैसलों से इंसानों को पूरी तरह बाहर करना जोखिम भरा हो सकता है. उनके विचार में AI भविष्य में काम करने के तरीके को बड़े स्तर पर बदल सकता है, लेकिन तकनीक के इस्तेमाल, जवाबदेही और सामाजिक मूल्यों से जुड़े अहम निर्णयों में मानवीय भूमिका पर गंभीरता से विचार करना जरूरी रहेगा.