Google आसानी से ढूंढ लेता है आपके फोन में बच्चों की फोटोज… जानें इस तकनीक के बारे में

हाल ही में दिल्ली पुलिस ने Google के अलर्ट के आधार पर 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. Google ने इन लोगों के फोन में बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से जुड़ा कंटेंट डिटेक्ट कर लिया था.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: हाल ही में दिल्ली पुलिस ने Google के अलर्ट के आधार पर 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. Google ने इन लोगों के फोन में बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से जुड़ा कंटेंट डिटेक्ट कर लिया था. अब सवाल यह उठता है कि Google को फोन की गैलरी में क्या स्टोर है, इसका पता कैसे चलता है?

Hash Matching Technology क्या है?

Google हैश मैचिंग टेक्नोलॉजी की मदद से यह काम करती है. इसमें हर फोटो और वीडियो को एक यूनिक डिजिटल फिंगरप्रिंट में बदल दिया जाता है. जैसे हर इंसान के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं, वैसे ही हर फाइल का हैश भी अलग होता है. यह प्रक्रिया एक तरफा (वन-वे) होती है. मतलब हैश बनाकर आप मूल फाइल को वापस नहीं बना सकते. हैश का साइज भी बहुत छोटा होता है, जिससे आसानी से स्टोर किया जा सकता है.

टू-वे हैशिंग क्या होती है?

क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग: यह बिल्कुल सटीक डिजिटल फिंगरप्रिंट बनाता है. अगर फोटो में एक पिक्सल भी बदल जाए तो हैश पूरी तरह अलग हो जाता है. यह पहले से ज्ञात CSAM की कॉपी को आसानी से पहचान लेता है.


परसेप्चुअल हैशिंग: यह इमेज की विजुअल जानकारी को समझता है. अगर फोटो में बदलाव किया जाए (जैसे साइज बदला, फिल्टर लगाया) तो भी यह CSAM को पहचान सकता है.

Google कैसे पता लगाता है?

जब कोई फाइल Google के सर्वर पर अपलोड होती है, तो उसका हैश पहले से बने CSAM डेटाबेस से मिलाया जाता है. अगर मैच होता है तो Google को अलर्ट मिल जाता है. अगर नया या एडिटेड कंटेंट है तो AI मॉडल उसकी पैटर्न को पहचान लेता है.

यह टेक्नोलॉजी बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे प्राइवेसी पर भी सवाल उठते हैं. Google का कहना है कि यह सिर्फ CSAM डिटेक्ट करने के लिए इस्तेमाल होता है.