नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने AI कंटेंट को लेकर कुछ बदलाव किए हैं. सरकार ने भारत में AI से बने कंटेंट के नियमों में बदलाव किया है. ये बदलाव आज से आधिकारिक तौर पर लागू भी कर दिया गया है. इन नियमों के तहत अगर आप सोशल मीडिया या कहीं भी AI से बना कंटेंट शेयर करते हैं, तो इससे आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
बता दें कि यह घोषणा आईटी मिनिस्ट्री द्वारा 10 जनवरी को की गई थी. सरकार ने साफतौर पर बताया है, अगर लोग गाइडलाइंस को फॉलो किए बिना इस तरह का कंटेंट शेयर करते हैं तो क्या होगा. चलिए जानते हैं इन नियमों के बारे में.
AI इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीपफेक और फेक कंटेंट के खतरे को लेकर बात की. यह समाज के लिए कितना बड़ा खतरा है और समाज के साथ यह कैसे खिलवाड़ कर रहा है, इस पर बात की. पीएम मोदी ने कंटेंट पर वॉटरमार्किंग और ज्यादा ट्रांसपेरेंट सोर्स स्टैंडर्ड्स पर जोर दिया, और बच्चों को ऑनलाइन प्रोटेक्ट करने के मामले में एक्स्ट्रा केयर की भी बात कही.
इसके साथ ही उन कंटेंट पर भी बात की जिन्हें सिंथेटिक तरीके से बनाया जाता है. कई लोग इस बारे में नहीं जानते हैं. नए नियमों के तहत, कोई भी चीज जो AI या कंप्यूटर ट्वीक्स की मदद से बनाई हो, जो एकदम इंसानों तरह, जगह या किसी इवेंट से मिलती-जुलती हो, उसे SGI कहा जाता है. इसका मतलब सिंथेटिकली जेनरेटेड AI कंटेंट है. नए नियमों के तहत इस तरह के कंटेंट को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले उसे लेबल या वॉटरमार्क करना होगा. इससे लोगों को यह पता चलेगा कि यह एआई निर्मित है.
कंटेंट पर लेबलिंग करना जरूरी है. अगर आप एआई कंटेंट को शेयर करते हैं तो उस पर लेब लगाना जरूरी होगा. जब आप इस पर एआई का लेबल लगा देते हैं, तो उसे हटाया नहीं जा सकता है.
सोशल मीडिया कंपनियों को कुछ टूल्स बनाने होंगे, जिससे यह चेक करने में मदद मिले कि कंटेंट एआई जनरेटेड है या नहीं. इस तरह का कंटेंट बिना वेरिफिकेशन के अपलोड नहीं किया जा सकेगा.
तीसरे बदलाव की बात करें तो हर 3 महीने में, प्लेटफॉर्म को यूजर्स को चेतावनी भी देनी होगी कि एआई का गलत इस्तेमाल करने पर उन पर जुर्माना या सजा हो सकती है.
चाइल्ड पोर्नोग्राफी
फेक डॉक्यूमेंट
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड
हथियारों या गोला-बारूद से जुड़ी कोई भी चीज
डीपफेक इमेज या वीडियो
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी ज्यादा है
अगर सरकार आपके किसी कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाने के लिए कहती है तो उन्हें 3 घंटे के अंदर एक्शन लेना होगा. उन्हें उस कंटेंट को हटाना होगा. इसके साथ ही प्लेटफॉर्म को यह फ्लैग करने के लिए कोड का इस्तेमाल करना होगा, जिससे यह पता चलेगा कि AI कंटेंट कहां बनाया गया था. इसके अलावा बच्चों से जुड़े हिंसक या पोर्नोग्राफिक कंटेंट पर 12 घंटे के अंदर जवाब देना होगा.
अगर ये नियम नहीं माने जाते हैं, तो आपको कानूनी परेशानी झेलनी पड़ सकती है. SGI या AI कंटेंट रेगुलेशन का उल्लंघन करने पर इंडियन पीनल कोड, प्रोटेक्शन ऑफ इंडियन सिटिजनशिप एक्ट, या POCSO एक्ट के तहत केस चल सकता है. इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म SGI तक एक्सेस को ब्लॉक करने के लिए ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल करता है, तो इसे IT एक्ट के सेक्शन 79 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा.