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Flipkart: अपने ही बिछाए जाल में फंस गया फ्लिपकार्ट, मिल गई ऐसी सजा!

Flipkart: फ्लिपकार्ट को अपने एक कस्टमर का ऑर्डर कैंसिल करना बहुत महंगा पड़ा है. ऑर्डर कैंसिल होने से कस्टमर को मेंटली सफर करना पड़ा.अब फ्लिपकार्ट को मुआवजे की राशि देनी होगी.

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Flipkart: ई-कॉमर्स प्लेटफार्म फ्लिपकार्ट से एक कस्टमर iPhone ऑर्डर करता है. ऑर्डर कंप्लीट हो जाता है और 2 दिन में डिलीवरी की डेट दिखती है. कस्टमर आईफोन का इंतजार करता है. दो दिन बीत जाते हैं. ऑर्डर नहीं आता. अचानक 6 दिन बाद फ्लिपकार्ट की ओर से ऑर्डर कैंसिल होने का मैसेज आता है. इसके बाद कस्टमर झल्ला उठता है. इसी मामले पर मुंबई की उपभोक्ता आयोग के एक पैनल ने फ्लिपकार्ट को ये आदेश दिया है कि कस्टमर को मेंटली सफर कराने के लिए वह उसे 10,000 रुपये का मुआवजा दे.

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि फ्लिपकार्ट ने जानबूझकर एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमाने के लिए आईफोन के ऑर्डर को कैंसिल किया, जो गलत है.

कस्टमर को मिला रिफंड

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बताया कि कस्टमर को ऑर्डर का रिफंड मिल चुका है लेकिन ऑर्डर कैंसिल होने से उसे जिस मेंटल स्टेट से गुजरना पड़ा उसके लिए फ्लिपकार्ट को कस्टमर को 10,000 रुपये देने होंगे.

क्या है पूरी कहानी?

मुंबई के दादर के एक व्यक्ति ने 10 जुलाई 2022 को फ्लिपकार्ट से एप्पल आईफोन का ऑर्डर दिया था. इसके लिए उसने क्रेडिट कार्ड से 39.628 रुपये भी पे किए थे. शिकायत के अनुसार आईफोन को 12 जुलाई 2022 को डिलीवर किया जाना था. लेकिन 18 जुलाई को कस्टमर के पास iPhone के कैंसिल होने का एसएमएस आता है.

इस मसले पर फ्लिपकार्ट की ओर से कहा गया कि उसके डिलीवरी बॉय ने कस्टमर को ऑर्डर डिलीवर करने के लिए कई प्रयास किए लेकिन कस्टमर की उपस्थिति न होने से ऑर्डर कैंसिल करना पड़ा.

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि ऑर्डर कैंसिल होने से केवल नुकसान ही बल्कि मानसिक उत्पीड़न हुआ है और ऑनलाइन फ्रॉड भी हुआ है.

फ्लिपकार्ट की डिलीवरी पार्टनर ई-कार्ट लॉजिस्टिक शिकायतकर्ता के पक्ष में था. इस पर आयोग ने कहा कि डिलीवरी पाटनर का लॉजिस्टिक फर्म से कंज्यूमर और सर्विस प्रोवाइडर के रूप में किसी भी प्रकार से कोई संबंध नहीं था.