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India Daily

बिना बताए कंपनियों के सिस्टम में घुस गए AI एजेंट! भारतीयों का गोपनीय डेटा खतरे में?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI एजेंट अब कंपनियों के लिए नई साइबर सुरक्षा चुनौती बनते दिख रहे हैं.

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Edited By: Reepu Kumari
बिना बताए कंपनियों के सिस्टम में घुस गए AI एजेंट! भारतीयों का गोपनीय डेटा खतरे में?
Courtesy: Pinterest

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने कंपनियों के काम करने का तरीका तेजी से बदल दिया है. अब AI एजेंट केवल सवालों के जवाब नहीं देते, बल्कि कई काम खुद करने की क्षमता भी रखते हैं. रिसर्च, जानकारी जुटाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को तेज करने में इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है. लेकिन यही क्षमता तब जोखिम बन सकती है, जब कोई AI एजेंट तय सीमा से आगे बढ़कर ऐसे कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच जाए, जहां संवेदनशील जानकारी मौजूद हो.

टेस्टिंग के दौरान तय दायरे से आगे निकले एजेंट

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ AI एजेंट का इस्तेमाल रिसर्च और परीक्षण के लिए किया जा रहा था. इसी दौरान वे अपने निर्धारित काम से आगे बढ़ गए और भारतीय संगठनों के वास्तविक कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच गए. इन सिस्टम में लोगों की निजी जानकारी और कंपनियों से जुड़ा गोपनीय डेटा मौजूद था. इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि AI एजेंट को सिस्टम तक पहुंच देने से पहले उनकी क्षमताओं और सीमाओं को स्पष्ट करना कितना जरूरी है. अगर किसी एजेंट को जरूरत से ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं, तो उसके अनचाहे काम करने से सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

कंपनियों को कैसे पता चली घटना?

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन संगठनों के सिस्टम तक पहुंच बनाई गई, उन्हें खुद इसकी जानकारी नहीं थी. बाद में AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों ने अपनी जांच के दौरान इन घटनाओं का पता लगाया. हालांकि, अभी तक प्रभावित भारतीय कंपनियों और संबंधित AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. इसके अलावा, कितना डेटा एक्सेस हुआ और इस घटना से कंपनियों को कितना नुकसान पहुंचा, इसकी पूरी जानकारी भी सामने नहीं आई है. इसलिए फिलहाल डेटा चोरी या नुकसान की सीमा को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा.

AI से साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ने की आशंका

CERT-In ने AI टूल्स के दुरुपयोग से होने वाले साइबर हमलों को लेकर भी चिंता जताई है. एजेंसी के मुताबिक, साइबर अपराधी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI टूल्स का इस्तेमाल भारतीय संगठनों को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं. ऐसे हमलों का उद्देश्य आर्थिक नुकसान पहुंचाना हो सकता है. चेतावनी के अनुसार, AI की मदद से साइबर हमलों की गति बढ़ सकती है. पहले किसी सिस्टम में सेंध लगाने और नुकसान पहुंचाने की प्रक्रिया में कई दिन लग सकते थे, लेकिन अब कुछ परिस्थितियों में यह काम कुछ घंटों में भी हो सकता है.

कंपनियां इन तरीकों से मजबूत करें सुरक्षा

CERT-In ने कंपनियों को अपने कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है. AI एजेंट को केवल उतनी ही अनुमति दी जानी चाहिए, जितनी उनके काम के लिए जरूरी हो. इसके साथ ही पासवर्ड और API Keys को सुरक्षित रखना, सिस्टम की लगातार निगरानी करना और पुराने API को हटाना भी अहम है.