Samsung से पहले ही Apple ने शुरू कर दी थी Foldable iPhone की तैयारी? 10 साल पुराना राज आया सामने!
Apple पिछले कई सालों से काम कर रहा है. इसके पीछे करीब 10 साल की रिसर्च बताई जा रही है. अगर यह फोन बाजार में आता है तो फोल्डेबल स्मार्टफोन की दुनिया में Apple की बड़ी एंट्री होगी.
नई दिल्ली: Apple अपने iPhone में अब तक का सबसे बड़ा डिजाइन बदलाव करने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च कर सकती है. इस फोन पर Apple पिछले कई सालों से काम कर रहा है. इसके पीछे करीब 10 साल की रिसर्च बताई जा रही है. अगर यह फोन बाजार में आता है तो फोल्डेबल स्मार्टफोन की दुनिया में Apple की बड़ी एंट्री होगी.
रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2020 में Apple के तत्कालीन सीईओ टिम कुक ने एशिया, खासकर चीन का दौरा किया था. उस दौरान उन्होंने सैमसंग और हुआवे के फोल्डेबल फोन को लोगों के बीच लोकप्रिय होते देखा. हालांकि, Apple की कुछ सीक्रेट टीमें इससे पहले ही फोल्डेबल तकनीक पर काम कर रही थीं, लेकिन इसके बाद कंपनी ने इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू किया. खबरों के अनुसार, इस फोन को V68 कोडनेम दिए जाने की बात कही जा रही है. कुछ रिपोर्ट्स में इसे iPhone Ultra भी कहा जा रहा है.
₹1.84 लाख से ज्यादा हो सकती है कीमत:
शुरुआत में रिपोर्ट सामने आई थी जिसके अनुसार, फोल्डेबल iPhone की कीमत करीब 1,999 डॉलर रखी जा सकती है. हालांकि, अब कहा जा रहा है कि इसकी शुरुआती कीमत लगभग 2,199 डॉलर यानी 1.84 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है. वहीं, इसके बड़े स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 3,000 डॉलर यानी लगभग 2.50 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.
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कैसा होगा डिजाइन:
फोन का डिजाइन इसे दूसरे iPhone से बिल्कुल अलग बना सकता है. बंद होने पर यह लगभग पासपोर्ट के आकार जैसा दिख सकता है. वहीं खोलने पर इसमें करीब 7.8 इंच की बड़ी स्क्रीन मिलने की उम्मीद है. बाहर की तरफ करीब 5.5 इंच का कवर डिस्प्ले दिया जा सकता है. इससे फोन को बंद करके सामान्य स्मार्टफोन की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा और बड़ी स्क्रीन खोलकर वीडियो देखने या एक साथ कई काम करने में सुविधा मिल सकती है.
स्क्रीन की क्रीज खत्म करना बड़ी चुनौती:
फोल्डेबल फोन में सबसे बड़ी परेशानी स्क्रीन के बीच दिखाई देने वाली क्रीज या लकीर होती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple ने इसे कम करने के लिए खास लचीले ग्लास और नए हिंज पर काम किया है. इसके अलावा कंपनी के सामने सॉफ्टवेयर को बड़ी स्क्रीन के हिसाब से बेहतर बनाने की चुनौती भी थी. iOS और ऐप्स को फोल्डेबल स्क्रीन के लिए ऑप्टिमाइज किया जा सकता है.