देहरादून: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के उन लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत विभाजन के दौरान असहनीय पीड़ा और विस्थापन का दर्द झेला. उन्होंने कहा कि यह दिन केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि मानवता और राष्ट्रीय एकता के महत्व को समझने का भी संदेश देता है.
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सांप्रदायिक विभाजन केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि इसने अनगिनत परिवारों को अपनों से अलग कर दिया. लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि, घर, आजीविका और जीवनभर की स्मृतियां छोड़कर विस्थापन की वेदना सहनी पड़ी. उन्होंने सभी पुण्यात्माओं को भावपूर्ण नमन करते हुए उनके साहस और धैर्य को देश के लिए प्रेरणा बताया.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक्स संदेश में लिखा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन सभी पुण्यात्माओं को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने भयावह परिस्थितियों में भी अदम्य साहस, धैर्य और मानवता का परिचय दिया. उन्होंने कहा कि विभाजन ने करोड़ों सपनों को अधूरा कर दिया और लाखों परिवारों का जीवन हमेशा के लिए बदल गया. धामी ने आगे कहा कि विभाजन का दर्द आज भी देश की सामूहिक स्मृतियों में जीवित है. यह इतिहास का केवल एक काला अध्याय नहीं, बल्कि ऐसी शाश्वत पीड़ा है जो हमें मानवता, एकता और भाईचारे के महत्व का सदैव स्मरण कराती रहेगी.
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर उन सभी पुण्यात्माओं को भावपूर्ण नमन, जिन्होंने विभाजन की विभीषिका के बीच असहनीय पीड़ा सहते हुए भी अदम्य साहस, धैर्य और मानवता का परिचय दिया।
सांप्रदायिक विभाजन की वह त्रासदी केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं थी, बल्कि इसने असंख्य परिवारों को… pic.twitter.com/etgOvJuny1— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 14, 2026Also Read
हर वर्ष विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन लोगों की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने भारत विभाजन के दौरान हिंसा, विस्थापन और अपनों से बिछड़ने की त्रासदी झेली. इस दिन देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और नई पीढ़ी को इतिहास की उस पीड़ा से परिचित कराया जाता है.
मुख्यमंत्री के संदेश का मुख्य उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि समाज में सौहार्द, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि इतिहास की त्रासदियों से सीख लेकर हमें ऐसा भारत बनाना चाहिए, जहां मानवता सबसे बड़ी पहचान बने.