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उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज, पहाड़ों में बर्फबारी देखने पहुंचे हजारों पर्यटक, कई जिलों में एवलॉन्च की चेतावनी जारी

उत्तराखंड में मौसम ने अपना मिजाज बदल लिया है. सालों बाद कई इलाकों में बर्फबारी हुई है. इसकी वजह से भारी संख्या में पर्यटक पहाड़ों पर पहुंचे हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज, पहाड़ों में बर्फबारी देखने पहुंचे हजारों पर्यटक, कई जिलों में एवलॉन्च की चेतावनी जारी
Courtesy: X (@airnewsalerts)

देहरादून: उत्तराखंड में आज यानी रविवार को मौसम के मिजाज में एक बार फिर बदलाव नजर आ रहा है. मौसम विभाग की ओर से राज्य के पर्वतीय जिलों में आंशिक बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है. वहीं मैदानी क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना रह सकता है. 

बारिश और बर्फबारी के बाद पहाड़ों में ठंड बढ़ गई है और पर्यटन गतिविधियों में तेजी देखने को मिल रही है. हालांकि पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, बारिश और बर्फबारी की वजह से लोगों को ऊंचे इलाकों में जाने से मना किया गया है.

मौसम विभाग ने क्या कहा?

मौसम विभाग ने बताया है कि आज उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है. इसके साथ ही 2800 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की भी संभावना है. इससे ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड और बढ़ सकती है, जबकि निचले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहेगा. शुक्रवार को हुई बर्फबारी के बाद पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है.

वीकेंड की छुट्टियों का फायदा उठाने बड़ी संख्या में सैलानी मसूरी, चकराता, धनौल्टी और औली जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पहुंचे. मसूरी में पर्यटकों को बर्फ देखने के लिए लंबा जाम भी झेलना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ. पर्यटकों की बढ़ती भीड़ का सीधा असर स्थानीय पर्यटन कारोबार पर पड़ा है. कई पर्यटन स्थलों पर होटल और होमस्टे पूरी तरह भर गए हैं. चंबा, केदरकांठा, चोपता, नाग टिब्बा, हर्षिल और देवरिया ताल जैसे ट्रैकिंग और प्रकृति पर्यटन स्थलों पर भी भारी संख्या में सैलानी पहुंचे हैं. इससे स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों के चेहरों पर रौनक लौट आई है. 

पहाड़ी किसानों के लिए अच्छी खबर

विशेषज्ञों का मानना है कि एक-दो दिन की बर्फबारी से ग्लेशियरों को कोई बड़ा लाभ नहीं मिलेगा . ग्लेशियरों और बुग्यालों के लिए लगातार अच्छी बर्फबारी जरूरी होती है. इसके बावजूद हालिया बर्फबारी को पहाड़ों के लिए संजीवनी माना जा रहा है. कई इलाकों में चार से दस साल बाद बर्फ गिरी है, जिससे खेती और बागवानी को भी राहत मिली है. बारिश और बर्फबारी के इंतजार में गेहूं और मटर की बुवाई रोककर बैठे किसानों को अब उम्मीद जगी है. इस बीच चंडीगढ़ स्थित रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान ने उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन की चेतावनी जारी की है.