चाय की चुस्की तो सुनी थी, अब चाय पत्ती के पकौड़े भी खाइए; उत्तराखंड की वादियों में स्वाद का नया ट्विस्ट

उत्तराखंड के चाय बागानों में पर्यटन को नया आयाम देने के लिए चाय पत्ती के पकौड़ों की अनोखी पहल शुरू की गई है. घोड़ाखाल के चाय बागान स्थित कैफे में पर्यटकों को ताजी हरी चाय पत्तियों से बने पकौड़े परोसे जा रहे हैं.

Gemini
Reepu Kumari

उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसे चाय बागान अब सिर्फ हरियाली और खुशबू के लिए ही नहीं, बल्कि एक अनोखे स्वाद के लिए भी पहचाने जाएंगे. राज्य के प्रमुख चाय बागानों में आने वाले पर्यटकों को अब ताजी चाय पत्तियों से बने कुरकुरे पकौड़ों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा. इस नई पहल को टी-टूरिज्म से जोड़कर देखा जा रहा है. चाय विकास बोर्ड का मानना है कि प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय व्यंजनों का मेल पर्यटकों को नया अनुभव देगा.

घोड़ाखाल में इसकी शुरुआत के बाद अब कौसानी और चंपावत के चाय बागानों में भी इस विशेष व्यंजन को शामिल करने की तैयारी की जा रही है. इससे पर्यटन गतिविधियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.

सिर्फ नजारे नहीं, अब मिलेगा नया स्वाद

उत्तराखंड के चाय बागान लंबे समय से पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं. यहां आने वाले लोग चाय की खेती और प्रसंस्करण की प्रक्रिया को करीब से देखते हैं. अब इसी अनुभव में स्वाद का नया रंग जोड़ने की कोशिश की गई है. पर्यटकों को चाय की ताजी हरी पत्तियों से बने पकौड़े परोसे जाएंगे, जिससे उनका सफर और भी यादगार बन सके.


टी-टूरिज्म को मिलेगा नया बढ़ावा

राज्य में घोड़ाखाल, कौसानी और चंपावत के चाय बागानों को टी-टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. इन स्थानों पर हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. चाय पत्ती के पकौड़ों जैसी नई पेशकश से न केवल पर्यटकों की रुचि बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को भी नई पहचान मिलेगी.

असोम के मॉडल से मिली प्रेरणा

चाय विकास बोर्ड के अधिकारियों ने असोम के चाय बागानों का दौरा किया था. वहां उन्होंने देखा कि पर्यटकों को चाय की हरी पत्तियों से बने पकौड़े परोसे जाते हैं. इसी विचार को उत्तराखंड में अपनाने का निर्णय लिया गया. अधिकारियों का मानना है कि यह प्रयोग पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन सकता है.

ऐसे तैयार किए जाते हैं खास पकौड़े

जानकारी के अनुसार चाय के पौधों की ऊपरी पत्तियां चाय उत्पादन के लिए इस्तेमाल होती हैं, जबकि नीचे की हरी पत्तियों का उपयोग पकौड़े बनाने में किया जाता है. इन पत्तियों का हल्का कसैलापन और प्राकृतिक स्वाद पकौड़ों को अलग पहचान देता है. यही खासियत इसे सामान्य पकौड़ों से अलग बनाती है.

पुदीने की चटनी बढ़ाती है स्वाद

चाय पत्ती के पकौड़ों को पुदीने की चटनी के साथ परोसा जाता है. चाय की पत्तियों का हल्का कड़क स्वाद और चटनी की ताजगी मिलकर एक अलग अनुभव देती है. पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि यह नया व्यंजन उत्तराखंड आने वाले सैलानियों के बीच लोकप्रिय होगा और राज्य के चाय बागानों की पहचान को और मजबूत करेगा.