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साथ जिए, साथ ही चले गए... बद्रीनाथ से लौटते समय बदरीधाम की वादियों में सदा के लिए खामोश हो गईं 5 जिगरी दोस्तों की सांसें

Uttarakhand Helicopter Crash: ​चमोली जिले में पवित्र बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर लौट रहे पांच पक्के दोस्तों और एक पायलट की हेलीकॉप्टर हादसे में असमय मौत हो गई. 30 अक्टूबर 2026 की उस मनहूस दोपहर, उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के पास चाई गांव में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

Shilpa Shrivastava
Nasir Husain
Reported By: Nasir Husain
साथ जिए, साथ ही चले गए... बद्रीनाथ से लौटते समय बदरीधाम की वादियों में सदा के लिए खामोश हो गईं 5 जिगरी दोस्तों की सांसें
Courtesy: ChatGPT AI

Uttarakhand Helicopter Crash: ​उत्तराखंड की हसीन लेकिन दुर्गम पहाड़ियों के बीच से एक ऐसी दर्दनाक खबर आई है, जिसने न सिर्फ कर्नाटक बल्कि पूरे देश के दिलों को झकझोर कर रख दिया है. चमोली जिले में पवित्र बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर लौट रहे पांच पक्के दोस्तों और एक पायलट की हेलीकॉप्टर हादसे में असमय मौत हो गई. 30 अक्टूबर 2026 की उस मनहूस दोपहर, उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के पास चाई गांव में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

चारों धामों के दर्शन की पवित्र यात्रा, बन गया साथ आखिरी सफर:

​बेंगलुरु और आसपास के इलाकों के रहने वाले ये पांचों दोस्त महज सहयात्री नहीं थे, वे एक-दूसरे के दिल के करीब, हर सुख-दुख के साथी और जिगरी यार थे. उन्होंने एक साथ चारधाम यात्रा की योजना बनाई थी, यह सोचकर कि बाबा के दर्शन भी होंगे और बरसों पुरानी दोस्ती की यादें भी और ताज़ा होंगी. लेकिन नियति के पन्नों में कुछ और ही लिखा था.

​इस हादसे में जान गंवाने वालों में बेंगलुरु पुलिस के सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) में तैनात 44 वर्षीय जांबाज पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके शामिल थे, जिनकी कर्तव्यनिष्ठा की हर कोई मिसाल देता था. उनके साथ थे तुमकुरू के 38 वर्षीय युवा और होनहार वकील वीबी शंकर गौड़ा, जिनकी मुस्कान से परिवार का घर महकता था. 51 वर्षीय एचएस नटराज, जो पोल्ट्री और रियल एस्टेट के एक सफल कारोबारी थे, अपने सरल और सहृदय स्वभाव के लिए जाने जाते थे. 41 वर्षीय बिजनेसमैन प्रताप निंगराजू और 50 वर्षीय सुधीर के. भी इस अटूट मंडली का हिस्सा थे, जिन्होंने जीवन के हर मोड़ पर एक-दूसरे का हाथ थामे रखा था.

​मातम में डूबे परिवार, टूट गईं उम्मीदें:

​जोशीमठ के पास चाई गांव के आसमान में जब वह दर्दनाक हादसा हुआ, तो उसकी गूंज सैकड़ों किलोमीटर दूर बेंगलुरु में उन परिवारों तक पहुंची, जो अपने अपनों के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. घर में आरती की तैयारियाँ थीं, धाम का प्रसाद आने वाला था, लेकिन बदले में पहुंची तो सिर्फ कलेजा चीर देने वाली एक खबर.

​वह मंडली जो कुछ घंटों पहले तक देवभूमि के सुरम्य वातावरण में एक-दूसरे के साथ हंस-बोल रही थी, तस्वीरें खिंचवा रही थी, वह पल भर में यादों के धुंधलके में खो गई. जिन हाथों ने एक साथ मिलकर बद्रीविशाल के आगे मत्था टेका था, वे अंत समय में भी एक-दूसरे के साथ ही रहे.

​अनंत यात्रा पर एक साथ:

​कहते हैं कि सच्चे दोस्त जीवन के हर रास्ते पर साथ चलते हैं, लेकिन शायद ही किसी ने सोचा था कि उनकी यह अटूट दोस्ती मौत के दरवाजे पर भी अलग नहीं होगी. देवभूमि की वादियों में हमेशा के लिए सो गए ये पांचों दोस्त अपने पीछे छोड़ गए हैं बिलखते हुए परिवार, टूट चुके दोस्त और कभी न भरने वाला एक गहरा सन्नाटा. ​ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को इस असह्य दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें.