मदरसों में अब जुमे की नहीं रविवार की छुट्टी, धामी सरकार के फैसले पर मचा सियासी घमासान

उत्तराखंड सरकार ने मदरसों में शुक्रवार की जगह रविवार को साप्ताहिक छुट्टी देने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे प्रदेश में समान व्यवस्था और समान नागरिक संहिता से जोड़ा है.

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Km Jaya

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने मदरसों में शुक्रवार यानी जुमे की साप्ताहिक छुट्टी खत्म कर रविवार को अवकाश देने का फैसला किया है. सरकार ने इस बदलाव को प्रदेश में समान व्यवस्था लागू करने से जोड़कर देखा है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू है, इसलिए शिक्षा समेत अलग-अलग क्षेत्रों में सभी के लिए एक जैसी व्यवस्था होनी चाहिए.

सरकार के इस फैसले के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है. मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने शुक्रवार की छुट्टी खत्म करने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि शुक्रवार को विशेष नमाज होने के कारण मदरसों में इस दिन साप्ताहिक अवकाश रखा जाता था. वहीं, कांग्रेस ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं.

452 मदरसों के आंकड़ों ने खड़े किए सवाल

छुट्टी को लेकर शुरू हुई बहस अब मदरसों की मान्यता और उनमें पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य तक पहुंच गई है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में पहले 452 मदरसे पंजीकृत थे. नए प्राधिकरण से इनमें से केवल 35 मदरसों को मान्यता मिली है. वहीं, 19 मदरसों को सील किया गया, जबकि 227 मदरसों को उनके संचालकों ने खुद बंद कर दिया.


इन आंकड़ों के बीच सबसे बड़ा सवाल उन बच्चों की शिक्षा को लेकर उठ रहा है, जो बंद हो चुके मदरसों में पढ़ते थे. सवाल है कि इन विद्यार्थियों की पढ़ाई अब कहां और किस व्यवस्था के तहत जारी है. क्या उनका दूसरे स्कूलों या शिक्षण संस्थानों में दाखिला कराया गया है, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.

खुर्शीद अहमद ने उठाए बच्चों की पढ़ाई पर सवाल

इस्लामिक मामलों के जानकार खुर्शीद अहमद ने कहा कि बहस सिर्फ इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि मदरसों में शुक्रवार को छुट्टी हो या रविवार को. उनके मुताबिक, सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि बंद हुए मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा का क्या इंतजाम किया गया है.

उन्होंने मदरसों के अलावा दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े शिक्षण संस्थानों की मान्यता का मुद्दा भी उठाया. उनके अनुसार, जैन, सिख, बौद्ध और ईसाई समुदायों से जुड़े 51 स्कूलों में से केवल दो को मान्यता मिली है. उन्होंने सवाल किया कि जिन संस्थानों को मान्यता नहीं मिली, वहां पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर क्या व्यवस्था की गई है.

धामी बोले- सभी के लिए होनी चाहिए समान व्यवस्था

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस लाइन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकार के फैसले पर बात की. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू है और प्रदेश में सभी के लिए समान नियम और व्यवस्थाएं होनी चाहिए. मुख्यमंत्री के मुताबिक, शिक्षा के क्षेत्र में भी इसी सिद्धांत के तहत मदरसों में शुक्रवार की जगह रविवार को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा. सरकार इसे सभी शिक्षण संस्थानों में समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देख रही है.

कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा

मदरसों में छुट्टी के फैसले पर कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार के पास मस्जिद, मदरसा और मजार के अलावा कोई दूसरा मुद्दा नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि शुक्रवार को विशेष नमाज के कारण मदरसों में साप्ताहिक अवकाश रखा जाता था. उन्होंने मदरसों की मौजूदा स्थिति और वहां पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठाए.

छुट्टी से ज्यादा बच्चों के भविष्य की चिंता

उत्तराखंड में शुक्रवार की जगह रविवार को मदरसों में छुट्टी देने का फैसला अब सिर्फ साप्ताहिक अवकाश के बदलाव तक सीमित नहीं रह गया है. इसके साथ मदरसों की मान्यता, बंद हुए संस्थानों और विद्यार्थियों की शिक्षा जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ गए हैं.

एक तरफ सरकार समान व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, वहीं आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि बंद या अमान्य संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा कैसे जारी रहेगी. ऐसे में इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की ओर से क्या व्यवस्था की गई है.