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उत्तराखंड में EC का बड़ा एक्शन! 17 राजनीतिक दलों की मान्यता खत्म, चुनाव लड़ने पर लगी रोक

निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड में 17 निष्क्रिय गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को पंजीकृत सूची से हटा दिया है. चुनाव न लड़ने और सत्यापन में कार्यालय नहीं मिलने के कारण यह कार्यवाही की गई है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
उत्तराखंड में EC का बड़ा एक्शन! 17 राजनीतिक दलों की मान्यता खत्म, चुनाव लड़ने पर लगी रोक
Courtesy: Pinterest

उत्तराखंड में निर्वाचन आयोग ने चुनावी व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. आयोग ने 17 गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को पंजीकृत सूची से बाहर कर दिया है. इन दलों ने साल 2019 के बाद न लोकसभा चुनाव लड़ा और न ही विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया. इसके अलावा भौतिक सत्यापन के दौरान इनके कार्यालय भी नहीं मिले. आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई निष्क्रिय दलों की सूची को अद्यतन रखने के उद्देश्य से की गई है.

17 दलों पर हुई कार्यवाही

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार हटाए गए दल लंबे समय से चुनावी गतिविधियों से दूर थे. जांच में यह भी सामने आया कि कई दलों के पंजीकृत कार्यालय निर्धारित पते पर मौजूद नहीं थे. इसी आधार पर निर्वाचन आयोग ने उन्हें गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की सूची से हटाने का फैसला लिया. इससे चुनावी रिकॉर्ड को अद्यतन रखने में मदद मिलेगी.

इन दलों के नाम सूची से हटे

कार्यवाही के तहत भारत कौमी दल, भारत परिवार पार्टी, भारतीय सम्राट सुभाष सेना, पीपल्स पार्टी, भारतीय मूल निवासी समाज पार्टी, भारतीय अंत्योदय पार्टी, भारतीय ग्राम नगर विकास पार्टी, गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट, प्रजातंत्र पार्टी ऑफ इंडिया, सुराज सेवा दल और उत्तराखंड जनशक्ति पार्टी सहित कुल 11 दलों को हटाया गया. इससे पहले अगस्त 2025 में छह अन्य दलों को भी सूची से बाहर किया जा चुका था.

अब नहीं मिलेगा दल का दर्जा

सूची से हटने के बाद ये संगठन पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का दर्जा भी खो देंगे. अब वे अपने नाम और चुनाव चिह्न के साथ किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. भविष्य में यदि इनके नेता चुनाव लड़ना चाहेंगे तो उन्हें किसी अन्य पंजीकृत दल का टिकट लेना होगा या फिर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरना पड़ेगा.

पारदर्शिता पर आयोग का जोर

निर्वाचन आयोग का मानना है कि निष्क्रिय राजनीतिक दलों को सूची में बनाए रखने से चुनावी व्यवस्था प्रभावित होती है. इसलिए समय समय पर ऐसे दलों का सत्यापन और समीक्षा आवश्यक है. इस प्रक्रिया से राजनीतिक दलों के रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बने रहेंगे. साथ ही सक्रिय दलों की पहचान भी आसान होगी.

चुनावी व्यवस्था होगी मजबूत

आयोग की इस पहल को चुनावी सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. इससे केवल सक्रिय और नियमों का पालन करने वाले राजनीतिक दल ही पंजीकृत सूची में बने रहेंगे. अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की नियमित समीक्षा से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और मतदाताओं का भरोसा भी मजबूत होगा.