पलायन से रोजगार तक, स्वतंत्रता दिवस पर CS आनंद बर्द्धन ने बताया विकसित उत्तराखंड का विजन

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्वतंत्रता दिवस पर विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य सामने रखा. उन्होंने रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और पारदर्शी प्रशासन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया.

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Kanhaiya Kumar Jha

देहरादून: देहरादून स्थित सचिवालय परिसर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदेश के विकास की भावी दिशा पर विस्तार से बात की. उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को नमन करते हुए कहा कि आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है. मुख्य सचिव ने उत्तराखंड के 25 वर्षों के सफर का उल्लेख करते हुए उपलब्धियों के साथ चुनौतियों पर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि विकास का केंद्र आम नागरिक, पहाड़ का युवा, महिलाएं और पर्यावरण होना चाहिए.

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष आत्ममंथन का समय हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन और डिजिटल कनेक्टिविटी में प्रगति हुई है. इसके बावजूद पहाड़ों से पलायन, रोजगार, दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य और शिक्षा, आपदा जोखिम तथा जल स्रोतों के संरक्षण जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं. उन्होंने हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा को विकास की योजना का जरूरी हिस्सा बताया.

विकसित उत्तराखंड में युवाओं और महिलाओं पर जोर

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में उत्तराखंड की भूमिका महत्वपूर्ण है. विकसित उत्तराखंड का मतलब केवल बड़े शहर और परियोजनाएं नहीं हैं. इसका अर्थ है कि पहाड़ का युवा अपने गांव में रोजगार पाए, महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनें और बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले. हर नागरिक को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलना भी इस विकास की पहचान होनी चाहिए.


प्रशासन में फाइल नहीं, परिणाम पर जोर

मुख्य सचिव ने सचिवालय को राज्य शासन का मस्तिष्क बताते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी का अहसास कराया. उन्होंने कहा कि सरकारी काम केवल फाइलों के निपटारे तक सीमित नहीं रहना चाहिए. प्रशासन को परिणाम देने वाली व्यवस्था बनाना होगा. तकनीक के इस्तेमाल से सेवाओं को तेज, पारदर्शी, संवेदनशील और नागरिकों के अनुकूल बनाने पर उन्होंने जोर दिया.

हिमालय, नदियों और जंगलों की सुरक्षा जरूरी

आनंद बर्द्धन ने उत्तराखंड को हिमालय का प्रहरी बताया. उन्होंने कहा कि राज्य की नदियां जल के साथ संस्कृति और अर्थव्यवस्था की भी आधारशिला हैं. जंगल जल स्रोतों, जैव विविधता और जलवायु संतुलन के लिए जरूरी हैं. इसलिए विकास का मॉडल हिमालय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए. आपदा प्रबंधन में पहले से तैयारी और जोखिम कम करने की रणनीति अपनाने की जरूरत है.

पर्यटन को जिम्मेदार और टिकाऊ बनाने का संकल्प

मुख्य सचिव ने पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया, लेकिन केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर जोर न देने की बात कही. उन्होंने जिम्मेदार, टिकाऊ और उच्च मूल्य वाले पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई. अंत में उन्होंने सचिवालय कर्मियों से कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता को कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया. उन्होंने हर निर्णय को उत्तराखंड और जनहित से जोड़ने की अपील की.