राहुल गांधी से क्यों नहीं मिले ज्ञानेश कुमार? चुनाव आयोग ने दी सफाई

राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से मुलाकात को लेकर घंटों आकाशवाणी भवन के बाहर धरना दिया, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने उनसे मुलाकात नहीं की.

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Sagar Bhardwaj

दिल्ली में मंगलवार को चुनाव आयोग और विपक्षी INDIA ब्लॉक के बीच टकराव की स्थिति बन गई. चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने आयोग से मुलाकात के लिए औपचारिक रूप से समय नहीं मांगा था. यह बयान उस समय आया जब विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.

संसद से ECI कार्यालय तक मार्च

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने निकले. विपक्षी नेताओं की मांग थी कि उन्हें चुनाव आयोग से मिलने दिया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें.

पुलिस ने सांसदों को आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया. इसके बाद विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना शुरू कर दिया.


आयोग को 4 बजे मिली प्रतिनिधिमंडल की जानकारी

चुनाव आयोग ने बाद में जारी एक प्रेस नोट में कहा कि दिल्ली पुलिस ने करीब शाम 4 बजे आयोग को बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलना और एक ज्ञापन सौंपना चाहता है.

आयोग के अनुसार राजनीतिक दलों या संयुक्त प्रतिनिधिमंडल के लिए मुलाकात की एक निर्धारित प्रक्रिया है. दलों को अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पहले समय लेना होता है और इसके बाद दोनों पक्षों की सहमति से बैठक का समय तय किया जाता है.

240 सांसदों की बैठक पर आयोग ने जताई आपत्ति

ECI के मुताबिक दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बाद में बताया कि प्रस्तावित बैठक में करीब 240 सांसद शामिल होना चाहते थे और बैठक संसद भवन एनेक्सी में आयोजित करने की बात थी.

चुनाव आयोग ने इस अनुरोध को असामान्य बताते हुए स्वीकार नहीं किया. आयोग का कहना था कि उसके प्रोटोकॉल के अनुसार राजनीतिक दलों या उनके प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक आयोग के अपने परिसर में होती है.

ज्ञापन लेने अधिकारी भेजने की पेशकश

हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्षी सांसदों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया. आयोग ने कहा कि उसने संसद भवन एनेक्सी में अपना सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी भेजकर सांसदों से ज्ञापन लेने की पेशकश की थी.

ECI ने इसे एक असाधारण कदम बताया, लेकिन उसके अनुसार सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी राजनीतिक दल किसी भी समय बैठक का अनुरोध कर सकता है. उपलब्ध समय के आधार पर आयोग बैठक की तारीख और समय तय करता है.

SIR को लेकर विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन

विपक्ष का यह प्रदर्शन मतदाता सूची के SIR को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच हुआ. INDIA ब्लॉक ने 30 सितंबर की विपक्षी बैठक के बाद संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च करने का फैसला किया था.

विपक्षी दलों का कहना है कि SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उनकी गंभीर चिंताएं हैं. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की है.

राहुल गांधी समेत कई बड़े नेता मार्च में शामिल

प्रदर्शन में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों के हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं और वे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे.

मार्च को नीति आयोग-अकाशवाणी भवन के आसपास पुलिस ने रोक दिया. इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सड़क पर धरना शुरू कर दिया. इस दौरान राहुल गांधी को पुलिस बैरिकेड पर चढ़ते हुए भी देखा गया. उनके हाथ में तिरंगा था.

करीब नौ घंटे चला धरना

लगभग नौ घंटे तक चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. पीटीआई के अनुसार करीब 250 लोगों और कई सांसदों को भी हिरासत में लिया गया.

विपक्ष ने SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के अलावा मतदाता पंजीकरण से जुड़े Form 6 में बदलाव का आरोप भी लगाया है. राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है.

चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज किया

विपक्ष के आरोपों को चुनाव आयोग पहले ही खारिज कर चुका है. मंगलवार का घटनाक्रम अब इस राजनीतिक विवाद को एक नए मोड़ पर ले गया है. एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग से सीधे बातचीत और अपनी शिकायतों पर जवाब चाहता है, वहीं आयोग अपनी निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैठकों की व्यवस्था पर जोर दे रहा है. आगामी दिनों में SIR और चुनावी पारदर्शिता को लेकर यह टकराव और बढ़ सकता है.