उत्तराखंड में बम धमाकों की धमकियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य के कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाने संबंधी संदेश सोशल मीडिया और ई-मेल के माध्यम से भेजे गए हैं. इन संदेशों के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया तथा संवेदनशील स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई. धमकी मिलने के बाद कई सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर एहतियाती कदम उठाए गए. सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और संदेश भेजने वालों की पहचान के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं. शुरुआती जांच में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है.
धमकी भरे संदेशों में केदारनाथ, बदरीनाथ, रेलवे स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा हरिद्वार नगर निगम कार्यालय और मसूरी नगर पालिका कार्यालय को भी निशाना बनाने की बात कही गई. संदेश मिलने के बाद संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन को तत्काल सतर्क कर दिया गया.
पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से 25 जून को उत्तराखंड के सभी पुलिस थानों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी. इस मामले में पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबर और प्रोफाइल की पहचान कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
धमकी भरे संदेशों की गंभीरता को देखते हुए साइबर विशेषज्ञों और पुलिस की टीमें लगातार जांच कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट और ई-मेल के स्रोत की पड़ताल की जा रही है. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संदेश किसी संगठित साजिश का हिस्सा तो नहीं हैं.
हरिद्वार में धमकी भरा ई-मेल मिलने के बाद बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की मदद से नगर निगम परिसर की जांच की गई. वहीं मसूरी में नगर पालिका परिसर को एहतियातन खाली कराया गया. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पूरे परिसर की तलाशी ली गई और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
जांच के दौरान सामने आए ई-मेल में कथित तौर पर एक खालिस्तान समर्थक संगठन का नाम लेकर भड़काऊ बातें लिखी गई हैं. संदेश में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी उल्लेख किया गया है. ई-मेल में हरिद्वार, ऋषिकेश, केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे प्रमुख स्थानों पर जून से 4 जुलाई के बीच हमले की चेतावनी दी गई है. मसूरी में प्राप्त ई-मेल में भी इसी तरह की बातें लिखी गई थीं. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं.
पुलिस का मानना है कि इस पूरे मामले के तार हाल में कर्णप्रयाग में हुई घटना से जुड़े हो सकते हैं. 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंग सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कई तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इन्हीं घटनाओं की पृष्ठभूमि में दहशत फैलाने का प्रयास तो नहीं किया गया.