उत्तराखंड की तड़ागताल झील ने पृथ्वी के बेहद पुराने इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेत सामने रखा है. चौखुटिया क्षेत्र की इस झील में वैज्ञानिकों को स्ट्रोमैटोलाइट्स के अवशेष मिले हैं, जिनकी उम्र करीब 100 से 150 करोड़ साल आंकी गई है. वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक झील के विकास और भूगर्भीय संरचना का अध्ययन कर रहे थे. इसी दौरान मिले इन अवशेषों से पता चला कि हिमालय बनने से बहुत पहले इस इलाके में सूक्ष्मजीवन मौजूद हो सकता था.
यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय का निर्माण करीब पांच से साढ़े पांच करोड़ वर्ष पहले भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों की टक्कर से हुआ था. उससे काफी पहले इस इलाके का भूगर्भीय इतिहास अलग था. तड़ागताल में मिले अवशेष उस समय के हैं, जब टेथिस सागर के बनने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई थी. ऐसे में यह झील पृथ्वी के प्राचीन जीवन और क्षेत्र की भूगर्भीय यात्रा को समझने का अहम सुराग दे सकती है.
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की ओर से तड़ागताल क्षेत्र में लगातार सर्वे किया जा रहा है. इसी अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों की नजर चट्टानों पर मौजूद विशेष संरचनाओं पर पड़ी. जांच में इन्हें स्ट्रोमैटोलाइट्स से जुड़ा बताया गया. ये ऐसी परतदार चट्टानी संरचनाएं होती हैं, जो सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों से लंबे समय में बनती हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार तड़ागताल में मिले अवशेष करीब 100 से 150 करोड़ वर्ष पुराने हैं.
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर शुरुआती जीवन का संबंध समुद्री वातावरण से माना जाता है. उस दौर में साइनोबैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीव बड़ी संख्या में मौजूद थे. ये जीव एक चिपचिपी परत बनाते थे और लंबे समय तक इनके जमा होने से परतदार चट्टानी संरचनाएं तैयार होती थीं. इन्हीं संरचनाओं को स्ट्रोमैटोलाइट्स कहा जाता है. तड़ागताल में इनके अवशेष मिलना संकेत देता है कि इस क्षेत्र में बहुत प्राचीन समय में सूक्ष्मजीवन मौजूद रहा होगा.
तड़ागताल कुमाऊं की प्रमुख बड़ी झीलों में गिनी जाती है. बारिश के मौसम में यह पूरी तरह पानी से भर जाती है और चारों तरफ मौजूद पहाड़ियां इसकी खूबसूरती बढ़ाती हैं. लेकिन इसकी खासियत केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है. भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड के मुताबिक यह रामगंगा घाटी के सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र में स्थित है. सर्दियों में झील का पानी तल में मौजूद पांच प्राकृतिक छिद्रों से बाहर निकल जाता है और खाली तल पर ग्रामीण खेती करते हैं.
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत कुमार गहलौत के अनुसार, झील के सर्वेक्षण के दौरान स्ट्रोमैटोलाइट्स मिले और अध्ययन से उनकी उम्र करीब 100 से 150 करोड़ वर्ष पुरानी सामने आई. यह समय हिमालय के निर्माण से करोड़ों वर्ष पहले का है. वैज्ञानिक मानते हैं कि भारतीय प्लेट के यूरेशियाई प्लेट से टकराने के बाद करीब पांच से साढ़े पांच करोड़ वर्ष पहले हिमालय का निर्माण हुआ. इससे पहले इस क्षेत्र का भूगर्भीय स्वरूप बिल्कुल अलग था.
वैज्ञानिकों के मुताबिक टेथिस सागर के बनने की प्रक्रिया करीब 25 करोड़ वर्ष पहले शुरू हुई थी. इसके मुकाबले तड़ागताल में मिले स्ट्रोमैटोलाइट्स कई गुना पुराने हैं. इसलिए इन अवशेषों का महत्व और बढ़ जाता है. यदि आगे के अध्ययन भी इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं, तो यह खोज हिमालय क्षेत्र के निर्माण से पहले यहां मौजूद पर्यावरण और जीवन को समझने में मदद कर सकती है. तड़ागताल अब केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पृथ्वी के प्राचीन इतिहास का संभावित दस्तावेज बनकर उभर रही है.