शिवभक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी, भारत से फिर होंगे कैलाश पर्वत के दर्शन; प्रशासन ने शुरू की तैयारी
उत्तराखंड के ओल्ड लिपुलेख व्यू पॉइंट को दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तैयारी चल रही है. सेना और आईटीबीपी के साथ मिलकर प्रशासन एसओपी तैयार कर रहा है. चलिए जानते हैं कैसे कर सकेंगे दर्शन.
पिथौरागढ़: भगवान शिव के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित ओल्ड लिपुलेख (लिपुपास) व्यू पॉइंट से एक बार फिर पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन संभव हो सकेंगे. सुरक्षा कारणों से बंद किए गए इस व्यू पॉइंट को दोबारा खोलने की तैयारी प्रशासन ने शुरू कर दी है.
जिला प्रशासन, सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के अधिकारियों के साथ चर्चा कर यात्रा के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार कर रहा है. सुरक्षा एजेंसियों की मंजूरी मिलने के बाद श्रद्धालुओं को भारत की सीमा के भीतर से ही तिब्बत स्थित पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन कराने की व्यवस्था शुरू की जाएगी.
धारचूला के एसडीएम ने क्या बताया?
धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी के अनुसार यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए रूट, परमिट, मेडिकल सुविधा और सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सभी पहलुओं को अंतिम रूप देने के बाद यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा.
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पुराना लिपुलेख व्यू पॉइंट नाभिढांग क्षेत्र के पास स्थित है, जहां से मौसम साफ रहने पर तिब्बत में स्थित पवित्र माउंट कैलाश के स्पष्ट दर्शन होते हैं. वर्ष 2025 में करीब 10 हजार श्रद्धालुओं ने यहां से कैलाश पर्वत के दर्शन किए थे. हालांकि इस वर्ष सुरक्षा कारणों से आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी.
क्यों है यह व्यू पॉइंट इतना खास?
यह व्यू पॉइंट इसलिए भी खास है क्योंकि यहां से श्रद्धालु बिना चीन गए और बिना पासपोर्ट या वीजा के कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकते हैं. पारंपरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा में श्रद्धालुओं को तिब्बत जाकर कैलाश पर्वत की परिक्रमा और मानसरोवर झील के दर्शन करने पड़ते हैं, जिसमें अधिक समय और खर्च लगता है. लेकिन ओल्ड लिपुलेख से केवल कैलाश पर्वत के दर्शन संभव हैं.
समुद्र तल से लगभग 17,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रशासन स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल प्रोटोकॉल और यात्रा नियमों को अंतिम रूप देने में जुटा है.
किन लोगों को होगा इससे लाभ?
इस पहल से धारचूला और कुमाऊं क्षेत्र के पर्यटन उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. स्थानीय होटल व्यवसायियों, होम-स्टे संचालकों और व्यापारियों को विश्वास है कि श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.